मंदिरों के विध्वंस से लेकर सिख गुरुओं के संघर्ष तक और रामराज्य भी पढ़ेंगे छात्र
एनसीईआरटी सामाजिक विज्ञान की नई किताब में काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास भी जानेंगे S
नई दिल्ली। एनसीईआरटी की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसायटी इंडिया एंड बियॉन्ड' पार्ट-2 में मध्यकालीन भारत के इतिहास को 'प्रतिरोध और दृढ़ता' के नजरिये से रखा गया है। किताब में मंदिरों के विध्वंस और पुनर्निर्माण, विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियों के प्रतिरोध, सिख गुरुओं के साथ मुगल सत्ता के टकराव और शासन की भारतीय परंपराओं का उल्लेख है। वहीं, 'रामराज्य', 'सत्यमेव जयते' और सुप्रीम कोर्ट के आदर्श वाक्य जैसे विषयों को आधुनिक शासन से जोड़ा गया है। पवित्र स्थलों' से जुड़े हिस्से में काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास का उल्लेख करते हुए किताब बताती है कि मंदिर को अलग-अलग दौर में क्षति पहुंची और उसका पुनर्निर्माण भी हुआ। किताब के अनुसार, अकबर के शासनकाल में टोडर मल और राजा मान सिंह से जुड़े संरक्षण के बाद मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ, जबकि बाद में औरंगजेब के शासनकाल में इसे फिर नष्ट किया गया। वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण 1780 में अहिल्याबाई होल्कर ने कराया। इसी हिस्से में मंदिरों पर हमलों को ऐतिहासिक संदर्भ में रखा गया है।
मथुरा-वृंदावन में मंदिरों के पुनर्निर्माण का जिक्र : किताब में मंदिरों के संरक्षण और पुनर्निर्माण के उदाहरण भी दिए गए हैं।
इसके तहत अहिल्याबाई होल्कर के काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ वृंदावन के गोविंद देवजी मंदिर के संरक्षण का उल्लेख है। बुंदेला शासक वीर सिंह द्वारा मथुरा में केशव देव मंदिर के निर्माण को संरक्षण देने की बात भी कही गई है। किताब के अनुसार 16वीं शताब्दी के बाद मंदिरों की वास्तुकला और उनके स्थान में भी बदलाव दिखाई देता है। कई मंदिर अपेक्षाकृत कम दिखाई देने वाली जगहों और संकरी गलियों में बनाए गए।
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