स्पेशल टीईटी... लखनऊ में पकड़ा गया एक फर्जी परीक्षार्थी
दोनों पालियों को मिलाकर 87.92 प्रतिशत रही उपस्थिति, सरकारी शिक्षकों के लिए कराई गई परीक्षा
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से मंगलवार को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित हुई। मंडल मुख्यालय लखनऊ के केंद्र 'बप्पा श्री नारायण वोकेशनल इंटर कॉलेज, स्टेशन रोड' पर एक फर्जी परीक्षार्थी को रंगे हाथों पकड़ लिया गया, जो किसी अन्य वास्तविक परीक्षार्थी के स्थान पर परीक्षा में बैठा हुआ था।
विधिक कार्रवाई करते हुए तत्काल उसे पुलिस को सौंप दिया गया। आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से सभी परीक्षा केंद्रों की लाइव निगरानी की गई। परीक्षा प्रदेश के छह मंडल मुख्यालयों (प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ व आगरा) के निर्धारित केंद्रों पर दो
सीएवी इंटर कॉलेज से परीक्षा देकर बाहर निकलते परीक्षार्थी।
पालियों में हुई।
पहली पाली की परीक्षा 09:30 से दोपहर 12:00 बजे तक व द्वितीय पाली की परीक्षा 02:30 से शाम 05:00 बजे तक कराई गई। आयोग के उप सचिव संजय सिंह के भुनसार, दोनों पालियों में कुल 93,681 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में प्रतिभाग किया जो कुल पंजीकृत परीक्षार्थियों का 87.92 प्रतिशत है।
प्रथम पाली (कक्षा 1 से 5) में पंजीकृत 58,353 परीक्षार्थियों के सापेक्ष 50,666 (86.80 प्रतिशत) अभ्यर्थी उपस्थित रहे, जबकि द्वितीय पाली (कक्षा 6 से 8) में पंजीकृत 48,194 अभ्यर्थियों में से 43,015 (89.25 प्रतिशत) परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी।
परीक्षा में महिला परीक्षार्थियों की उपस्थिति 89.25 प्रतिशत तथा
कठिन प्रश्नप्रत्र से जूझे अभ्यर्थी
परीक्षा देकर केंद्र से बाहर निकले शिक्षकों ने बताया कि प्रश्न पत्र को बहुत ही कठिन बनाया गया था। वाराणसी से आए एक शिक्षक ने बताया कि स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना, जनगणना व एसआईआर जैसे कार्य करने के साथ यहां परीक्षा देने आया हूं।
लखनऊ की महिला शिक्षिका ने बताया कि वर्षों से हम लोग स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अब टीईटी की तैयार करना बहुत चुनौती पूर्ण रहा। सरकार को सहूलियत देनी चाहिए। जौनपुर जनपद से आए एक शिक्षक ने बताया कि वह 21 वर्षों से पढ़ा रहे हैं। इतना कठिन प्रश्न पत्र बनाकर ज्यादा से ज्यादा लोग फेल करने की मंशा से है।
पुरुष परीक्षार्थियों की उपस्थिति 89.28 प्रतिशत दर्ज की गई।
अब स्कूल खुद बताएंगे अपनी कमजोरी, डिजिटल फ्रेमवर्क से होगा मूल्यांकन राज्य ब्यूरो, जागरण लखनऊः
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्यों को खुद यह बताना होगा कि उनके विद्यालय में पढ़ाई का स्तर कैसा है और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। इसके लिए स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क किया (एसक्यूएएएफ) लागू जाएगा। इसके तहत बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों का डिजिटल माध्यम से मूल्यांकन होगा। स्कूल पहले अपना आकलन करेंगे। इसमें सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए सुधार की कार्ययोजना भी बनानी होगी। एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार ने बताया कि स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथारिटी की स्थापना के तहत यह फ्रेमवर्क तैयार है। इसे जल्द लागू किया जाएगा।
