UGC NET 2026: दो सही उत्तरों का दावा खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी की याचिका की निरस्त
UGC NET 2026: दो सही उत्तरों का दावा खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी की याचिका की निरस्त
प्रयागराज। UGC NET परीक्षा 2026 के एक प्रश्न के उत्तर को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने प्रश्न के दो विकल्पों को सही मानने की मांग खारिज करते हुए याचिका निरस्त कर दी।
क्या है पूरा मामला?
मामला UGC NET परीक्षा के प्रश्न संख्या 144 से संबंधित था। प्रश्न में पूछा गया था कि निम्नलिखित में से कौन-सी संघीय संविधान की विशेषता नहीं है। इसके विकल्पों में सत्ता का पृथक्करण, शक्तियों का विभाजन, लिखित एवं कठोर संविधान और न्यायालय की सर्वोच्चता शामिल थे।
प्रश्न की उत्तर कुंजी में पहले विकल्प यानी ‘सत्ता का पृथक्करण’ को सही उत्तर माना गया था। हालांकि, अभ्यर्थी ऋतिक श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि ‘न्यायालय की सर्वोच्चता’ को भी संघीय संविधान की विशेषता नहीं माना जाना चाहिए। इस आधार पर उन्होंने दूसरे विकल्प को भी सही मानने की मांग की।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की अदालत ने अभ्यर्थी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संघीय संविधान की विशेषताओं के संदर्भ में ‘न्यायालय की सर्वोच्चता’ को गलत उत्तर नहीं माना जा सकता।
अभ्यर्थी ने यह भी तर्क दिया कि प्रश्न के विकल्पों में अस्पष्टता होने के कारण उसे दो अंक दिए जाने चाहिए थे, जिससे वह परीक्षा में अर्हता प्राप्त कर सकता था। हालांकि, अदालत ने इस आधार पर भी राहत देने से इनकार कर दिया।
अभ्यर्थियों के लिए क्या है संदेश?
यह मामला प्रतियोगी परीक्षाओं की उत्तर कुंजी को चुनौती देने से जुड़ा है। किसी प्रश्न के एक से अधिक विकल्पों को सही मानने की मांग पर अदालत संबंधित विषय के तथ्यों और उपलब्ध विशेषज्ञ राय पर विचार कर सकती है। केवल अभ्यर्थी की असहमति के आधार पर उत्तर कुंजी में बदलाव या अतिरिक्त अंक मिलना सुनिश्चित नहीं होता।
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