इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम आदेश: मां को बच्चे से मिलने का अधिकार, पिता के घर जाकर कर सकती हैं मुलाकात
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बच्चे की कस्टडी और मां के विजिटेशन राइट्स से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे को मां के घर लाने के लिए पिता को मजबूर नहीं किया जा सकता, लेकिन मां अपने विजिटेशन राइट्स का उपयोग करते हुए पिता के घर जाकर बच्चे से मिल सकती हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामला मीनू की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, 10 अगस्त के आदेश के तहत मीनू को अपने बेटे चिराग अत्री से मिलने का अधिकार दिया गया था। इसके अंतर्गत वह अपने पति सत्येंद्र सिंह के घर जाकर बच्चे से मिल सकती थीं।
उन्हें प्रत्येक शनिवार और रविवार को बच्चे की अस्थायी कस्टडी लेने तथा रोजाना शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक वीडियो कॉल पर बात करने की अनुमति भी दी गई थी।
कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
सुनवाई के दौरान मीनू ने अदालत को बताया कि उन्हें बच्चे से मिलने का अधिकार तो मिल रहा है, लेकिन सत्येंद्र सिंह के घर जाने में परेशानी होती है। इस पर अदालत ने निर्देश दिया कि सत्येंद्र सिंह बच्चे को उसकी मां के घर लेकर आएं।
न्यायमूर्ति संदीप जैन ने चिराग अत्री और संबंधित पक्षों की मौजूदगी में मामले की सुनवाई की। अदालत ने बच्चे से भी बातचीत की। बच्चे ने दोहराया कि वह अपनी मां के साथ नहीं रहना चाहता।
मां के मुलाकात के अधिकार पर जोर
इस मामले में अदालत का आदेश बच्चे के हित और माता-पिता के बीच मुलाकात की व्यवस्था से जुड़ा है। बच्चे की कस्टडी और मां के विजिटेशन राइट्स अलग-अलग विषय हैं। मुलाकात का अधिकार मिलने का अर्थ यह नहीं है कि बच्चे की स्थायी कस्टडी भी स्वतः मिल गई है।
