समान काम-समान वेतन चाहिए तो काम की समानता साबित करें
समान काम-समान वेतन चाहिए तो काम की समानता साबित करें
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि समान काम के लिए समान वेतन का दावा करने वाले संविदा कर्मचारियों को यह साबित करना होगा कि वे नियमित कर्मचारियों के समान प्रकृति, गुणवत्ता और जिम्मेदारी वाला काम कर रहे हैं। केवल पदनाम समान होने से समान वेतन पाने का अधिकार नहीं मिल जाता।
कोर्ट ने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल), झांसी के 265 संविदा कर्मचारियों को नियमित अकुशल कर्मचारियों के बराबर वेतन और भत्ते देने संबंधी श्रम आयुक्त का आदेश रद्द कर दिया। साथ ही मामले में नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने स्पष्ट किया कि समान वेतन का दावा करने वाले कर्मचारियों को अपने काम की नियमित कर्मचारियों के काम से वास्तविक समानता साबित करनी होगी। इसका दायित्व कर्मचारियों पर ही है। मामले के अनुसार, भेल संविदा श्रमिक संघ ने उत्तर प्रदेश के श्रम आयुक्त के समक्ष दावा किया था कि विभिन्न ठेकेदारों के माध्यम से नियुक्त कर्मचारी कई वर्षों से स्थायी प्रकृति का काम कर रहे हैं। उनका काम भेल के नियमित कर्मचारियों के समान है। पांच जनवरी 2005 को श्रम आयुक्त ने ड्यूटी रोस्टर, कार्य पंजिका, प्रवेश पत्र, वेतन पर्ची और अनुभव प्रमाणपत्र सहित विभिन्न दस्तावेजों के आधार पर 265 संविदा कर्मचारियों को नियमित अकुशल कर्मचारियों के बराबर वेतन और भत्ते देने का निर्देश दिया था।
भेल ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। कंपनी की ओर से दलील दी गई कि श्रम आयुक्त ने काम की वास्तविक प्रकृति, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, प्रशिक्षण और जिम्मेदारियों के अंतर का उचित मूल्यांकन नहीं किया
.jpeg)