365 दिन CCL पर एक जरूरी बात बिना कोई आदेश आए इस पर अनावश्यक बहस ग्रुप में करना निरर्थक है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं को मिलने वाली 730 दिन की CCL को 365 दिन करने, पुरुष कर्मियों को अलग से पितृत्व/Child Care Leave देने तथा अन्य सुविधाओं की सिर्फ सिफारिश की है।
⚠️ अभी यह कोई शासनादेश नहीं है, केवल आयोग की सिफारिश है।
लेकिन एक बात बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए—
👉 महिला शिक्षिकाओं की CCL में कटौती करके पुरुषों को CCL देना उचित व्यवस्था नहीं होगी।
एक महिला शिक्षिका बच्चे को जन्म देने से लेकर उसके लालन-पालन, स्वास्थ्य, पढ़ाई, घर-परिवार की जिम्मेदारी और स्वयं विद्यालय की नौकरी—सब कुछ एक साथ संभालती है। इसलिए महिला शिक्षिकाओं को मिलने वाली CCL उनके अधिकार के रूप में सुरक्षित रहनी चाहिए।
👉 पुरुष शिक्षकों को भी बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी में समान भागीदारी का अवसर मिले, इसके लिए पुरुषों के लिए अलग से पर्याप्त पितृत्व/Child Care Leave का प्रावधान किया जाना चाहिए।
अर्थात समाधान यह नहीं कि महिलाओं का अधिकार कम किया जाए, बल्कि यह हो कि पुरुषों को भी अलग से अवकाश देकर बच्चों की जिम्मेदारी में बराबर भागीदार बनाया जाए। पहल इस पर होनी चाहिए
📌 महिला का अधिकार सुरक्षित रहे और पुरुष की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित हो—यही अधिक संतुलित और न्यायसंगत व्यवस्था होगी।
*महिलाओं को 730 के बजाय 365 दिन CCL देने की सिफारिश की राष्ट्रीय महिला आयोग ने*
* 365 दिन CCL काटकर पुरुष कर्मियों को मिलेगी CCL, पुरुषों को पितृत्व अवकाश अनिवार्य रूप से दिया जाय, गोद लिए बच्चे पर भी 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश व CCL
* *राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने* केंद्र सरकार को मातृत्व और बाल देखभाल कानूनों को मजबूत करने के लिए 37 सिफारिशें सौंपी हैं। इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य मौजूदा बाल देखभाल अवकाश (CCL) को महिला-केंद्रित ढांचे से बदलकर लिंग-भेद रहित (Gender-Neutral) बनाना है, ताकि बच्चों की देखभाल केवल मां की जिम्मेदारी न रहे।
अभी यह शासनादेश नहीं है *केवल आयोग की सिफारिशें* हैं l
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