यूपीआई : 0.4% एमडीआर पर 18 फीसदी जीएसटी भी
नई दिल्ली। व्यापारियों को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर लगने वाले 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) पर 18 फीसदी जीएसटी भी देना होगा। टैक्स विशेषज्ञों ने यह दावा किया है। हालांकि, वे इस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर पाएंगे, जिससे उनका कर बोझ कम हो जाएगा। एनपीसीआई ने मंगलवार को यूपीआई भुगतान पर एमडीआर शुल्क की घोषणा की, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है।
इस बीच, सरकारी सूत्रों ने कहा कि एमडीआर को वापस नहीं लिया जाएगा। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, फैसला पलटने का सवाल ही नहीं है। अधिकारी ने कहा, संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति ने चेतावनी दी कि शून्य एमडीआर सरकारी खजाने पर दबाव डालती है और इन्फ्रा में निवेश क्षमता को सीमित करती है। टिकाऊ राजस्व व्यवस्था बनाना जरूरी है। एजेंसी >> शुल्क का ज्वेलर्स ने किया विरोध : पेज 10
इन श्रेणियों में 5 रुपये एमडीआर रेलवे, दूरसंचार सेवा, बीमा और ईंधन जैसी खास श्रेणियों में कारोबारियों के लिए 2,000 रुपये से ज्यादा भुगतान पर भी सिर्फ 5 रुपये का रियायती एमडीआर रेट लागू होगा। स्कूल फीस भुगतान भी 2,000 से ज्यादा होने पर सिर्फ 5 रुपये प्रति लेनदेन शुल्क है।
एमडीआर लागू करने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती : यूपीआई पर एमडीआर लगाने के केंद्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता ने दाखिल की है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि नई व्यवस्था मनमानी और भेदभावपूर्ण है और इससे पूरे देश में कारोबारियों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।
