69 हजार भर्ती : आरक्षण लाभ लेने के बाद सामान्य वर्ग में नहीं जा सकते
दिल्लीः उत्तर प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती के मामले में सामान्य वर्ग के नौकरी कर रहे सहायक शिक्षकों की ओर से दलील दी गई कि एक बार आरक्षण का लाभ लेने के बाद आरक्षित वर्ग अधिक अंक लाने पर भी सामान्य वर्ग में नहीं जा सकता।
अभ्यर्थियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने कहा कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को भर्ती में आयु, फीस और अंकों में छूट दी गई है। यह छूट नहीं बल्कि आरक्षण की श्रेणी में आता है। अगर हाई कोर्ट की खंडपीठ का 13 अगस्त, 2024 का फैसला लागू होता है, तो छह साल से इस भर्ती के तहत नौकरी कर रहे करीब 10 हजार शिक्षक नौकरी से बाहर हो जाएंगे। मामले में 22 सितंबर को फिर सुनवाई होगी। मामले की
उत्तर प्रदेश शिक्षक भर्ती विवाद में सामान्य, वर्ग के अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में दी दलील
कहा-हाई कोर्ट का फैसला लागू होता है, तो 10 हजार शिक्षक नौकरी से बाहर हो जाएंगे
सुनवाई जस्टिस एसवीएन भट्टी और एनवी अंजारिया की पीठ कर रही है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले पर बहस हुई, जिसमें चयनित और नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों की ओर से पक्ष रखा गया। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता और राकेश मिश्रा पेश हुए। शोभा गुप्ता ने कहा कि यहां सवाल है कि आरक्षित वर्ग के जिन लोगों ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरक्षित वर्ग के तौर पर छूट ली है क्या वे अधिक अंक आने पर अनारक्षित वर्ग की रिक्तियों पर नियुक्ति पा सकते हैं।
22 सितंबर को होगी मामले के संबंध में अगली सुनवाई
जिन्होंने आरक्षित वर्ग को मिलने वाली छूट ली है, वे अनारक्षित वर्ग यानी सामान्य वर्ग में माइग्रेट किए जाने का दावा नहीं कर सकते। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के चार फैसले हैं।
दीपा ईवी बनाम भारत सरकार, गौरव प्रधान बनाम राजस्थान राज्य, दिल्ली सरकार बनाम प्रदीप कुमार एवं अन्य तथा भारत सरकार बनाम जी. किरन का फैसला इस मुद्दे को पूरी तरह कवर करता है। उन्होंने वर्तमान विवाद से संबंधित भर्ती प्रक्रिया और विवाद का सिलसिलेवार ब्योरा दिया। कहा कि
उनके मुवक्किलों का सही चयन हुआ है। उन्होंने यह साबित करने के लिए कि ज्यादातर सीटें आरक्षित वर्ग के हिस्से में जा रही हैं, कोर्ट में आंकड़े भी पेश किए।
गुप्ता ने कहा कि आरक्षित वर्ग का कहना है कि उन्होंने भले ही पहले छूट ली हो, लेकिन अगर उन्होंने सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में 65 प्रतिशत या उससे अधिक अंक अर्जित किए हैं तो ऐसे मेधावियों को 1994 के अधिनियम की धारा 3(6) के तहत सामान्य वर्ग में माना जाए। इतना ही नहीं इसके बाद जिला आवंटन के समय फिर उन्हें आरक्षित वर्ग का माना जाए। शुरुआत में आरक्षित वर्ग के वकीलों ने पक्ष रखना चाहा। कोर्ट ने कहा कि वह सभी पक्षों को सुनेगा। कोर्ट ने अगली तारीख 22 सितंबर को तय कर दी।
