राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की कमी, छात्रों से अधिक वसूली
प्रयागराज। प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों में नियमों के विपरीत छात्रों से वसूली करने का मामला सामने आया है। विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की वजह से निजी अध्यापकों से बड़े पैमाने पर शिक्षण कार्य कराया जा रहा है।
प्रदेश के 2,460 राजकीय विद्यालयों में 12,000 से अधिक प्रवक्ता और अध्यापकों की कमी है। गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के शिक्षक नहीं हैं। राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश संरक्षक रामेश्वर पांडेय ने बताया कि 80 फीसदी स्कूलों में प्रवक्ता नहीं हैं।
किसी भी राजकीय इंटर कॉलेज में स्टाफ पूरा नहीं है। ग्रामीण अंचल के स्कूलों की स्थिति दयनीय है। अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षकों के अभाव में प्रधानाचार्य छात्रों से शिक्षक-अभिभावक संघ के नाम पर वसूली कर रहे हैं। वे प्रतिमाह 300 रुपये से 400 रुपये वसूल कर निजी शिक्षकों को
नियमों के विपरीत निजी शिक्षकों से कराया जा रहा शिक्षण कार्य
अभिभावकों की शिकायतें
प्रयागराज के छात्र के अभिभावक केपी मिश्रा ने बताया कि पहले की तुलना में राजकीय इंटर कॉलेजों में पढ़ाई नहीं हो रही है। निर्धारित फीस से अधिक राशि देनी पड़ रही है। वहीं, देवरिया के अभिभावक गणेश यादव ने कहा कि 300 रुपये से 400 रुपये प्रतिमाह फीस लेने के बाद भी रसीद नहीं दी जाती। यह वसूली गरीब छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।
भुगतान करते हैं।
अपर निदेशक (बेसिक) व कार्यवाहक एडी (राजकीय) मनोज कुमार द्विवेदी का कहना है कि शिक्षक अभिभावक संघ फंड लेकर कुछ कार्य कर सकता है लेकिन मासिक वसूली फीस के नाम पर नहीं की जा सकती है। यदि शिकायत मिलती है तो मामले की जांच कराई जाएगी।
