TGT : यूपीईएसएससी की उत्तरकुंजी में जो उत्तर गलत, वह यूपीपीएससी में सही
प्रयागराज : प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती-2022 के हिंदी विषय के एक प्रश्न के उत्तर में 'अर्थ दोष' को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (यूपीईएसएससी) द्वारा सही नहीं मानने पर चयन से वंचित अभ्यर्थी साक्ष्यों के साथ हाई कोर्ट पहुंचे हैं। अब सहायक अध्यापक स्नातक श्रेणी (एलटी) प्रारंभिक परीक्षा 2025 के हिंदी विषय की उत्तरकुंजी में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने एक तरह से 'अर्थ दोष' वाले उत्तर को सही
टीजीटी हिंदी भर्ती में एक उत्तर सही न मानने पर चयन से वंचित अभ्यर्थी लड़ रहे कानूनी लड़ाई
माना है। दोनों आयोगों के प्रश्न एकदम समान नहीं हैं, लेकिन अभ्यर्थियों का दावा है कि उत्तर के भाव एक जैसे हैं। टीजीटी अभ्यर्थियों ने एलटी की उत्तरकुंजी के इस उत्तर को अपनी याचिका में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है।
हाई कोर्ट में याचिका लगाए टीजीटी-2022 के हिंदी विषय के अभ्यर्थी धर्मेंद्र सिंह व ज्ञान प्रकाश ने याचिका में बताया है कि शिक्षा
सेवा चयन आयोग ने जो पहली उत्तरकुंजी जारी की थी, उसमें संबंधित प्रश्न के उत्तर के रूप में 'अर्थ दोष' के विकल्प को सही माना था, लेकिन बाद में जारी अंतिम उत्त्तरकुंजी में 'अर्थ दोष' के स्थान पर 'वाक्य दोष' वाले विकल्प को सही मान लिया गया। प्रश्न था कि पुनरुक्ति दोष किस श्रेणी का है। इसके विपरीत लोक सेवा आयोग की एलटी परीक्षा में प्रश्न है कि 'अभिकथन (ए) काव्य के दोष की संस्कृत में व्यापक चर्चा की गई है। भामह में सदोष रचना को सक्षात मृत्यु के समान माना है।
