दो साल से बच्चों को मध्याह्न भोजन नहीं, एनएचआरसी ने लिया संज्ञान
बलिया : मध्याह्न भोजन योजना में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता का मामला अब मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। जनपद के इंटर कालेज ताजपुर मुड़ियारी में दो वर्षों से विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन नहीं मिलने की खबर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में मामले की जांच, दोषियों पर कार्रवाई और विद्यार्थियों को मिल रही सुविधाओं की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। उधर, जिलाधिकारी की जांच में करीब 14 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद प्रधानाचार्य और जिला समन्वयक के विरुद्ध एफआइआर के निर्देश दिए गए हैं। योजना की यह विसंगति तब सामने आई थी जब स्कूल के छात्रों ने जिलाधिकारी को गोपनीय पत्र लिखकर मध्याह्न भोजन नहीं बंटने की शिकायत की।
आयोग ने कहा है कि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बच्चों के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का
आयोग ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में दोषियों पर हुई कार्रवाई की मांगी रिपोर्ट
बच्चों की ओर से जिलाधिकारी को लिखे गए गोपनीय पत्र से उजागर हुई थी विसंगति
मामला हो सकता है। दैनिक जागरण ने 27 अगस्त को 'दो साल से नहीं मिल रहा एमडीएम, बच्चों ने डीएम को लिखी गोपनीय चिट्ठी' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। डीएम मंगला प्रसाद सिंह की जांच में प्रधानमंत्री पोषण अभियान की राशि के दुरुपयोग का मामला सही साबित हो चुका है। इस बीच मध्याह्न भोजन (एमडीएम) में छात्रों की वास्तविक संख्या के सापेक्ष भोजन व कन्वर्जन कास्ट (मध्याह्न भोजन के लिए प्रति विद्यार्थी धनराशि) के भुगतान में पारदर्शिता के लिए अब विद्यार्थियों की प्रतिदिन की संख्या स्पष्ट करने वाला जीपीएस फोटोग्राफ सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने इसके लिए जिम्मेदारों को निर्देश जारी किया है।
