छह साल बाद याचिका वापस लेने पर हाईकोर्ट ने बीएसए से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने लंबे समय से लंबित याचिका को करीब छह साल बाद अचानक वापस लिए जाने और शिकायत के निस्तारण का कोई दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने प्रयागराज के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने उपकार कुशवाहा की याचिका पर दिया है। याची ने बेसिक शिक्षा अधिकारी के 25 फरवरी 2018 को पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। याची ने जूनियर बेसिक स्कूल में सहायक अध्यापक के रूप में कार्य करने पर रोक लगाने और नियमित वेतन दिलाने की मांग की थी। कोर्ट ने वर्ष 2019 को बीएसए के विवादित आदेश के संचालन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। इसके बाद मामला लंबित रहा और करीब छह वर्ष बीतने के बाद याची के अधिवक्ता ने यह कहते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी कि उसकी शिकायत का समाधान हो गया है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि शिकायत किस तरह और किस आदेश या कार्रवाई से निस्तारित हुई। न तो विवादित आदेश वापस लेने, संशोधित करने या निष्प्रभावी करने का कोई दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखा गया और न ही निस्तारण की परिस्थितियां बताई गईं। कोर्ट ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और अवैध रिश्वत के आरोप बार-बार उसके संज्ञान में आते रहे हैं। ऐसे में लंबित मुकदमे के दौरान किसी प्रशासनिक कार्रवाई से विवाद समाप्त होने का दावा किया जाए तो उसके पीछे की परिस्थितियों को रिकॉर्ड पर रखना जरूरी है।
