बीपीएड को टीईटी से रोका, अब भर्ती में अनिवार्य
प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) के 17735 पदों पर भर्ती के नियम ने शारीरिक शिक्षा विषय के अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश में जुलाई 2011 में आरटीई लागू होने के बाद से अब तक जितनी भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) कराई गई उसमें बीपीएड और बीपीई अभ्यर्थियों को शामिल नहीं किया गया और अब शुक्रवार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी टीजीटी भर्ती के विज्ञापन में इन अभ्यर्थियों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया गया है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने साफ किया है कि शारीरिक शिक्षकों के लिए किसी भी भर्ती में टीईटी का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। 23 अगस्त 2010 के बाद से आज तक एनसीटीई ने शारीरिक शिक्षा के लिए कोई संशोधन या अलग से कोई गाइडलाइन भी जारी नहीं की है। बीपीएड बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप यादव का कहना है कि जब बीपीएड या बीपीई वाले टीईटी का फॉर्म ही नहीं भर सकते तो उनके पास टीईटी का प्रमाणपत्र कैसे हो सकता है।
इस मामले में चयन आयोग के पीआरओ डॉ. संजय सिंह का कहना है कि नियमावली का निर्धारण माध्यमिक शिक्षा विभाग ने किया है। इस भर्ती में शारीरिक शिक्षा विषय के 849 (784 बालक और 65 बालिका) के पद शामिल हैं। इनमें अनारक्षित वर्ग के 344, ओबीसी 223, एससी 154 और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 128 पद हैं।
केंद्रीय-नवोदय विद्यालय की भर्ती में अनिवार्य नहीं
देशभर में जहां भी शारीरिक शिक्षकों की भर्ती होती है वहां टीईटी की अनिवार्यता नहीं है। केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों में भी शारीरिक शिक्षकों की भर्ती के लिए भी टीईटी की अनिवार्य नहीं है। इसके बावजूद टीजीटी में मनमाने तरीके से टीईटी को लागू कर दिया गया है।
