69,000 शिक्षक भर्ती: सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, एक ही दलील बार-बार न दोहराएं, पूरा रिकॉर्ड देखकर होगा फैसला
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े आरक्षण और चयन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मंगलवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी सामने आई। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों के वकीलों को सलाह दी कि एक ही दलील को बार-बार दोहराने के बजाय रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों और तथ्यों पर ध्यान केंद्रित करें।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों की दलीलें और दस्तावेज रिकॉर्ड में मौजूद हैं तथा अंतिम फैसला लेने से पहले पूरे रिकॉर्ड की गहन समीक्षा की जाएगी। मामले में सुनवाई बुधवार को भी जारी रहने की बात कही गई है।
एक ही बात बार-बार दोहराने पर कोर्ट की आपत्ति
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि सभी पक्ष अपनी-अपनी बातें और दस्तावेज पहले ही रिकॉर्ड पर ला चुके हैं। ऐसे में एक ही बिंदु को अलग-अलग तरीके से बार-बार रखने से मामले के मूल तथ्य नहीं बदलेंगे।
कोर्ट ने वकीलों से कहा कि वे केवल नई कानूनी दलीलों और रिकॉर्ड में मौजूद महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर अपना ध्यान केंद्रित करें।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ कर रही है।
नौकरी कर रहे B.Ed अभ्यर्थियों को कैसे हटाया जाएगा?
सुनवाई में 69,000 भर्ती के तहत वर्तमान में नौकरी कर रहे B.Ed अभ्यर्थियों को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल उठा।
पीठ ने सवाल किया कि जब भर्ती के समय B.Ed अभ्यर्थियों को पात्र माना गया था और करीब 35 हजार अभ्यर्थी चयनित होकर नौकरी कर रहे हैं, तो अब उन्हें किस आधार पर हटाया जा सकता है?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई चयन सूची तैयार होने की स्थिति में पहले से नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों की स्थिति पर असर पड़ सकता है।
B.Ed के अंक अधिक होने पर BTC अभ्यर्थी का चयन कैसे?
कोर्ट ने एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल उठाया। यदि ATET/एटीएआई परीक्षा को चयन का आधार माना गया है और किसी B.Ed अभ्यर्थी के अंक अधिक हैं, तो केवल B.Ed होने के आधार पर उसे हटाकर कम अंक वाले BTC अभ्यर्थी का चयन किस आधार पर किया जा सकता है?
पीठ ने इस पहलू पर भी संबंधित पक्षों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
नई भर्ती सूची में वरिष्ठ अभ्यर्थियों को हटाने का मुद्दा
सुनवाई के दौरान यह तर्क भी सामने आया कि यदि भर्ती सूची दोबारा तैयार की जाती है और B.Ed अभ्यर्थियों को हटाकर केवल BTC अभ्यर्थियों को पात्र माना जाता है, तो पहले से चयनित और नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों की स्थिति क्या होगी।
आरक्षित वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने दलील दी कि नियुक्तियां तत्कालीन नियमों के तहत हुई थीं। यदि भर्ती सूची दोबारा तैयार की जाती है, तो केवल BTC अभ्यर्थियों को पात्र मानकर B.Ed अभ्यर्थियों को बाहर नहीं किया जा सकता।
आरक्षण कानून और 1994 के शासनादेश का मुद्दा
आरक्षित वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गोयल ने भी अपनी दलील रखी। उन्होंने कहा कि एडहॉक प्रक्रिया का पालन किया गया है, लेकिन चयन में आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को लेकर सवाल हैं।
उन्होंने 1994 के आरक्षण कानून, नियम 14 और 23 मार्च 1994 के शासनादेश का हवाला दिया।
पीठ ने शासनादेश की प्रामाणिकता और उसकी वास्तविक भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या यह शासनादेश वास्तव में भर्ती प्रक्रिया में लागू किया गया था अथवा बाद में जारी किसी कार्यालयी पत्र के माध्यम से इसकी व्याख्या की गई।
इसके बाद राज्य सरकार के अधिवक्ता से आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया।
कोर्ट ने कहा- सभी पक्षों की दलीलें रिकॉर्ड में हैं
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इससे पहले 11 अधिवक्ता अपनी दलीलें रख चुके हैं और सभी पक्षों की बातें रिकॉर्ड पर हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से एडहॉक, कटऑफ और वेटेज जैसे मुद्दों पर भी दलीलें दी गईं।
कोर्ट का संकेत साफ है कि अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वह सभी पक्षों की दलीलों के साथ-साथ संबंधित दस्तावेजों और पुराने रिकॉर्ड का अध्ययन करेगा।
अगस्त 2024 के लखनऊ हाईकोर्ट के फैसले का भी जिक्र
मामले में अगस्त 2024 में लखनऊ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा नई सूची तैयार करने के निर्देश दिए जाने का भी उल्लेख हुआ।
इसी आदेश और उसके बाद उत्पन्न परिस्थितियों के कारण 69,000 शिक्षक भर्ती की चयन सूची, आरक्षण व्यवस्था और B.Ed अभ्यर्थियों की पात्रता का विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है।
अब रिकॉर्ड और दस्तावेजों की होगी गहन समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट की मंगलवार की सुनवाई से इतना स्पष्ट है कि अदालत मामले को केवल मौखिक दलीलों के आधार पर आगे नहीं बढ़ाना चाहती। भर्ती के समय लागू नियम, आरक्षण कानून, शासनादेश, चयन प्रक्रिया, अभ्यर्थियों के अंक और पहले से की गई नियुक्तियों से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अदालत ने संकेत दिया है कि अंतिम फैसला लेने से पहले पूरे रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी। वहीं सुनवाई बुधवार को भी जारी रहने की बात सामने आई है।
69,000 भर्ती मामले में फिलहाल सबसे अहम सवाल
क्या भर्ती के समय B.Ed अभ्यर्थियों की पात्रता वैध थी?
करीब 35 हजार नौकरी कर रहे B.Ed अभ्यर्थियों की स्थिति क्या होगी?
अधिक अंक वाले B.Ed अभ्यर्थी को केवल डिग्री के आधार पर हटाया जा सकता है या नहीं?
कम अंक वाले BTC अभ्यर्थी के चयन का आधार क्या होगा?
नई सूची तैयार होने पर पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों पर क्या असर पड़ेगा?
1994 के आरक्षण कानून और संबंधित शासनादेश को भर्ती में किस तरह लागू किया गया?
अगस्त 2024 के लखनऊ हाईकोर्ट के आदेश के बाद तैयार होने वाली सूची का आधार क्या होगा?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। अदालत सभी पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही मामले में अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचेगी।
