विशेष अपील खारिज, कोर्ट ने कहा- अपग्रेडेड स्कूलों में शिक्षक भर्ती की रिक्तियां घटाना सही
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी जूनियर हाईस्कूल के हाईस्कूल अथवा मामला 1 इंटरमीडिएट कॉलेज के रूप में अपग्रेड व मान्यता प्राप्त हो जाने के बाद उत्पन्न होने वाली नई रिक्तियों को जूनियर हाईस्कूल की रिक्तियां नहीं की जा सकती।
इस टिप्पणी संग कोर्ट ने सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती को लेकर दाखिल विशेष अपीलों को खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने अलीगढ़ के प्रदीप कुमार सिंह व 35 अन्य की विशेष अपीलों पर दिया।
हाईकोर्ट ने 1262 से घटाकर 634 पद करने को माना वैध
मामले में 3 नवंबर 2025 को जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के 1262 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। बाद में कुछ संस्थानों के हाईस्कूल या इंटरमीडिएट कॉलेज के रूप में अपग्रेड होने की स्थिति सामने आने पर मार्च 2026 को जारी अधिसूचनाओं के जरिये ऐसे संस्थानों की रिक्तियों को भर्ती से अलग कर दिया गया।
इससे रिक्तियों की संख्या 1262 से घटकर 634 रह गई। इसे अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। एकलपीठ में राहत न मिलने पर अभ्यर्थियों ने वर्तमान विशेष अपील दायर की है। अभ्यर्थियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि भर्ती प्रक्रिया लगभग पूरी होने के बाद रिक्तियों की संख्या कम करना
बीच में नियमों को बदलने के समान है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ के तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान हाईकोर्ट फैसले का हवाला दिया गया।
कोर्ट ने अभ्यर्थियों की दलील खारिज कर दी। साथ ही कहा कि सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2021 में सफल होना या अनंतिम चयन सूची में नाम आना नियुक्ति का अटल अधिकार नहीं देता। वर्तमान मामले में रिक्तियां घटाने का आधार संस्थानों की कानूनी स्थिति और लागू भर्ती नियमों का क्षेत्र था, इसलिए कार्रवाई को मनमाना नहीं कहा जा सकता।
हाईकोर्ट ने 19 फरवरी 2026 के एकल पीठ के फैसले में कोई कानूनी त्रुटि नहीं पाई और 9 मार्च तथा 15 मार्च 2026 की अधिसूचनाओं को भी बरकरार रखा। सभी विशेष अपीलें खारिज कर दीं।
