69,000 शिक्षक भर्ती : शीर्ष कोर्ट में अंतिम बहस, किसी भी चयनित शिक्षक को हटाने के पक्ष में नहीं सरकार
ईडब्ल्यूएस आरक्षण का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के आरक्षण का मुद्दा भी उठा। राज्य सरकार ने कहा कि इस भर्ती में ईडब्ल्यूएस का कोई विवाद नहीं है। हाईकोर्ट इस मुद्दे को खारिज कर चुका है। सुनवाई बुधवार को जारी रहेगी।
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अंतिम बहस शुरू हो गई। जस्टिस एसबीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ के समक्ष चयनित शिक्षकों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने कहा कि ये शिक्षक करीब छह साल से नौकरी कर रहे हैं। भर्ती में अगर कोई गलती हुई भी है तो इसमें इन शिक्षकों की कोई भूमिका नहीं है। इसलिए उन्हें नौकरी से हटाया नहीं जाना चाहिए।
राज्य सरकार की ओर से वकील अंकित गोयल ने भी कोर्ट में कहा कि सरकार किसी भी चयनित शिक्षक को नौकरी से हटाने के पक्ष में नहीं है। इस पर पीठ ने सवाल किया कि अगर सरकार ऐसे चयनित शिक्षकों को हटाना नहीं चाहती, जिनका चयन नियमों के खिलाफ
हुआ है, तो उन आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्याय कैसे मिलेगा, जो छह साल से अदालत में अपने हक की लड़ रहे हैं।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि पिछली पीठ इस मामले में अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही थी। हालांकि जस्टिस भट्टी ने कहा कि मौजूदा पीठ सभी पक्षों को सुनने के बाद ही फैसला करेगी।
