नॉर्मलाइजेशन Normalization के बाद UPTET में 150 से अधिक अंक दिखने का क्या है गणित? जानिए पूरी प्रक्रिया
शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) में नॉर्मलाइजेशन के बाद किसी अभ्यर्थी के 150 से अधिक अंक दिखने पर अक्सर भ्रम की स्थिति बन जाती है। हाल ही में यूपी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट में भी 150 से अधिक अंकों को देखने की कई सारी प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर मिल रही हैं जिसमें कई सारे लोग अपनी मार्कशीट को सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।
ऐसे मैक्सिमम नंबर से भी अधिक बढ़े हुए नंबरों को देखकर यूजर्स कई तरह की प्रक्रियाएं सोशल मीडिया पर दे रहे हैं पर हम आपको बता दें कि बोर्ड की इस वैज्ञानिक और सांख्यिकीय स्केलिंग प्रक्रिया का उद्देश्य कठिन पालियों के मेधावी छात्रों को न्याय दिलाना है।
यूपीटेट (UPTET) या किसी भी शिक्षक पात्रता परीक्षा में कुल पूर्णांक 150 अंकों का ही होता है। इसलिए, किसी भी अभ्यर्थी के वास्तविक प्राप्तांक (Raw Marks) 150 से अधिक नहीं आ सकते हैं।
यदि आपको सोशल मीडिया या कहीं ऐसी चर्चा सुनने को मिलती है कि नॉर्मलाइजेशन के बाद किसी के नंबर 150 से ज्यादा (जैसे 152 या 155) हो गए हैं, तो इसके पीछे की तकनीकी सच्चाई और गणितीय प्रक्रिया को निम्नलिखित उदाहरण से समझा जा सकता है:
नॉर्मलाइजेशन में स्कोर बढ़ने का गणितीय उदाहरण
जब परीक्षा अलग-अलग शिफ्टों या दिनों में होती है, तो हर शिफ्ट के पेपर का कठिनाई स्तर (Difficulty Level) अलग होता है। इसे संतुलित करने के लिए बोर्ड नॉर्मलाइजेशन (Normalisation Formula) का उपयोग करता है। इस प्रक्रिया में अंकों को एक विशेष फॉर्मूले के तहत स्केल (Scale) किया जाता है।
स्थिति: मान लीजिए परीक्षा दो शिफ्टों (शिफ्ट-1 और शिफ्ट-2) में हुई।
शिफ्ट-1 (आसान पेपर): इस शिफ्ट का औसत स्कोर 100 था और सबसे ज्यादा पाने वाले छात्र के 142 नंबर थे।
शिफ्ट-2 (बहुत कठिन पेपर): इस शिफ्ट का औसत स्कोर केवल 75 था और सबसे होशियार छात्र के भी 125 नंबर ही आ पाए।
अब बोर्ड सभी शिफ्टों के स्तर को बराबर लाने के लिए एक फॉर्मूला लगाता है, जिसमें कठिन शिफ्ट के अंकों में 'बढ़ोत्तरी' (Boost/Scaling) की जाती है। इस फॉर्मूले की गणितीय कैलकुलेशन के कारण, जब कठिन शिफ्ट के किसी मेधावी छात्र के रॉ मार्क्स (मूल अंक) मान लीजिए 140 थे, तो नॉर्मलाइजेशन के बाद वह बढ़कर 151 या 152 दशमलव अंकों में प्रदर्शित होने लगते हैं।
मुख्य बातें :
पूर्णांक सीमा: परीक्षा का मूल पूर्णांक 150 ही रहता है।
स्केलिंग का असर: 150 से अधिक अंक दिखना केवल सांख्यिकीय नॉर्मलाइजेशन (Statistical Normalization and Scaling) का परिणाम होता है, जिसका उद्देश्य कठिन शिफ्ट के छात्रों को न्याय दिलाना होता है।
भ्रम की स्थिति: कई बार लोग इसे वास्तविक अंक मान लेते हैं, जबकि यह बोर्ड के एल्गोरिदम द्वारा तय किया गया एक नॉर्मलाइज्ड स्कोर होता है।
शिक्षक पात्रता परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया किसी की मेधा का हनन नहीं, बल्कि अलग-अलग पालियों के कठिन स्तरों के बीच संतुलन स्थापित करने का वैज्ञानिक तरीका है। बोर्ड के इस पारदर्शी और न्यायसंगत फॉर्मूले से ही सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलते हैं।
