प्रधानों को प्रशासक के रूप में छह माह का एक और कार्यकाल मिलने के पूरे आसार
लखनऊ। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग पंचायत आरक्षण पर अपनी रिपोर्ट नवंबर-दिसंबर में ही दे पाएगा। इसके बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में प्रधानों को प्रशासक के रूप में छह माह का एक और कार्यकाल मिलने के पूरे आसार हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अप्रैल 2026 में होने थे, लेकिन समय पर नहीं हो सके। 26 मई को प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद पंचायतीराज विभाग ने छह माह के लिए उन्हें ही प्रशासक बना दिया था। यह अवधि नवंबर में समाप्त होगी। वहीं, मई में ही समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया था। आयोग को पंचायत चुनाव में
आरक्षण के मामले में अपनी संस्तुति देनी है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट तैयार करने में न्यूनतम
विधानसभा चुनाव के चलते पंचायत चुनाव होना मुश्किल
छह माह का समय लगेगा। आयोग को रिपोर्ट तैयार करने के लिए सभी 75 जिलों का भ्रमण करना है। 17 अगस्त तक वह 22 जिलों का भ्रमण कर चुका था। 18 अगस्त को आयोग के सदस्य कन्नौज और 19 अगस्त को फर्रुखाबाद में रहेंगे। इस तरह 50 से अधिक जिले अभी सर्वे के लिए बाकी हैं। आयोग से जुड़े लोगों का कहना है कि रिपोर्ट नवंबर-दिसंबर में ही सरकार को सौंपी जा सकेगी।
वर्ष 2022 में यूपी में विधानसभा चुनाव के
लिए जनवरी में आचार संहिता लागू हो गई थी। इस बार भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कह चुके हैं कि यूपी में विधानसभा चुनाव तय समय पर होंगे, क्योंकि चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है। ऐसे में दिसंबर के बाद यूपी में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। चुनाव प्रक्रिया अप्रैल-मई तक पूरी होने की संभावना है। ऐसे में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव जून-जुलाई से पहले होना मुश्किल लग रहा है। मामला अदालत में विचाराधीनग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने संबंधी 25-26 मई के शासनादेश को असंवैधानिक बताया है। मामले में अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी। इसमें समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से अपने काम की स्थिति रिपोर्ट पेश की जाएगी, जबकि राज्य सरकार की ओर से भी अपना पक्ष रखा जाएगा।
