परिषदीय स्कूल : अंग्रेजी स्कूलों में हो रही हिन्दी में पढ़ाई
लखनऊ,
अंग्रेजी माध्यम के 16 हजार परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में हिंदी में पढ़ाई कराई जा रही है। अंग्रेजी माध्यम की पूरी किताबें मिलती नहीं और स्कूलों को अंग्रेजी में पढ़ने वाले छात्र भी कम मिलते हैं। पढ़ाने को तैनात किए गए शिक्षकों के भी दूसरी जगह तबादले हो गए। ऐसे में पढ़ाई कराना कठिन हो रहा है।
सभी जिलों के प्रत्येक ब्लॉक में 17-17 अंग्रेजी माध्यम स्कूल हैं और इसके अलावा नगर क्षेत्र में भी यह विद्यालय चल रहे हैं। सबसे बड़ी कठिनाई यह है कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को कभी भी पूरी किताबें अंग्रेजी में छपी नहीं मिलती। दूसरी समस्या यह है कि कक्षा पांच तक जैसे-तैसे अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई छात्रों को कराई जाती है लेकिन अंग्रेजी के उच्च प्राथमिक स्कूल बहुत कम हैं। उदाहरण के तौर पर बीकेटी ब्लॉक में 17 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में से सिर्फ दो महिगवां व बसहा उच्च प्राथमिक स्कूल अंग्रेजी माध्यम के हैं। ऐसे में अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई कर छात्र आगे कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में नहीं कर पाते। वर्ष 2017 से चरणबद्ध ढंग से 16 हजार विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में तो तब्दील कर दिया गया लेकिन यह मकसद पूरा नहीं कर पा रहे।
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन, के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं कि न किताबें मिलती हैं, न शिक्षक हैं और न ही अंग्रेजी में पढ़ने वाले ज्यादा छात्र।
पहले चयन फिर तबादला माध्यम
पढ़ाई कराने के लिए शिक्षकों की परीक्षा ली गई। उनसे विकल्प लिया गया और उसके बाद उनकी तैनाती हुई। समायोजन की प्रक्रिया में अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों को हिंदी माध्यम के स्कूलों में तैनात कर दिया गया।
कंपोजिट बेहतर विकल्प
अगर बेसिक शिक्षा परिषद यह प्रयोग कंपोजिट स्कूलों यानी जहां प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल एक ही परिसर में हैं वहां करते तो कठिनाई न होती। छात्र कक्षा एक से कक्षा आठ तक आसानी से अंग्रेजी माध्यम
