दावा : रोज धूप सेंकने से नियंत्रण में रहेगी शुगर
रोजाना धूप सेंकने से कंट्रोल में रह सकती है ब्लड शुगर! शोध में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 20% तक कम होने का दावा
नई दिल्ली। डायबिटीज से बचाव और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए केवल खानपान और व्यायाम ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक रोशनी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जर्मन डायबिटीज सेंटर और एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अध्ययन में प्राकृतिक धूप और ब्लड शुगर के स्तर के बीच सकारात्मक संबंध सामने आया है। शोध के अनुसार, दिन के समय प्राकृतिक रोशनी के संपर्क में रहने से शरीर की जैविक घड़ी (Biological Clock) बेहतर तरीके से काम करती है, जिसका असर ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर नियंत्रण पर पड़ सकता है।
4.20 लाख से अधिक लोगों के डाटा का किया गया विश्लेषण
शोध में यूके बायोबैंक के 4.20 लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य संबंधी डाटा का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि जिन लोगों को ब्लड शुगर टेस्ट से पहले के दिनों में अपेक्षाकृत अधिक प्राकृतिक रोशनी मिली थी, उनमें ब्लड शुगर का स्तर कम दर्ज किया गया।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, प्राकृतिक रोशनी और ब्लड शुगर के बीच यह संबंध सर्दियों के महीनों में अधिक महत्वपूर्ण दिखाई देता है। इस दौरान दिन छोटे होते हैं और लोगों को प्राकृतिक धूप कम मिल पाती है।
प्राकृतिक धूप में रहने से बेहतर रहा ब्लड शुगर नियंत्रण
जर्मन डायबिटीज सेंटर के शोधकर्ताओं ने टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों पर प्राकृतिक रोशनी के प्रभाव का अध्ययन किया। इसमें देखा गया कि दिन के समय खिड़कियों से आने वाली प्राकृतिक रोशनी में रहने वाले मरीजों का ब्लड शुगर स्तर कृत्रिम रोशनी में रहने वालों की तुलना में अधिक समय तक सामान्य सीमा में बना रहा।
शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि प्राकृतिक रोशनी शरीर में ग्लूकोज के उपयोग और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकती है।
टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 20 फीसदी तक कम होने का दावा
शोध में प्राकृतिक रोशनी के अधिक संपर्क और टाइप-2 डायबिटीज के कम जोखिम के बीच संबंध भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, धूप में अधिक समय बिताने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज विकसित होने का खतरा करीब 20 फीसदी तक कम पाया गया।
हालांकि, यह एक शोध आधारित संबंध है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि केवल धूप सेंकने से डायबिटीज को रोका या ठीक किया जा सकता है।
शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक पर पड़ता है असर
हमारे शरीर में एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है, जिसे Biological Clock या Circadian Rhythm कहा जाता है। यह सोने-जागने, हार्मोन के स्राव, पाचन और मेटाबॉलिज्म जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है।
दिन के समय प्राकृतिक रोशनी मिलने से शरीर की जैविक घड़ी बेहतर तरीके से संचालित होती है। इससे इंसुलिन और ग्लूकोज के संतुलन को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
इसके विपरीत, देर रात तक मोबाइल, टीवी और लैपटॉप की तेज रोशनी के संपर्क में रहने तथा अनियमित नींद से शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित हो सकती है। इसका असर मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर नियंत्रण पर भी पड़ सकता है।
प्री-डायबिटीज में जल्दी सोना भी है जरूरी
डायबिटीज से बचाव के लिए पर्याप्त नींद और सही समय पर सोना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने प्री-डायबिटीज से पीड़ित और प्रतिदिन 6.5 घंटे से कम सोने वाले 200 वयस्कों पर आठ सप्ताह तक अध्ययन किया।
शोध में पाया गया कि जो लोग सामान्य से एक घंटा पहले सोने लगे, उनका वजन औसतन 0.73 किलोग्राम अतिरिक्त कम हुआ।
शोधकर्ताओं के अनुसार, देर रात तक जागने से भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं, जबकि समय पर सोने से वजन नियंत्रण में मदद मिल सकती है।
डायबिटीज से बचाव के लिए अपनाएं ये आदतें
सुबह और दिन के समय सुरक्षित तरीके से प्राकृतिक रोशनी में समय बिताएं।
नियमित रूप से पैदल चलने और व्यायाम करने की आदत डालें।
संतुलित आहार लें और मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
रात में समय पर सोएं और पर्याप्त नींद लें।
देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप के इस्तेमाल से बचें।
नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच कराते रहें।
महत्वपूर्ण बात: प्राकृतिक धूप स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन डायबिटीज की दवाओं, इंसुलिन, संतुलित खानपान और व्यायाम का विकल्प नहीं है। धूप में अधिक देर रहने से बचें और अपनी त्वचा की सुरक्षा का ध्यान रखें। डायबिटीज के मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही अपनी उपचार योजना जारी रखें।
निष्कर्ष: स्वस्थ जीवनशैली में प्राकृतिक रोशनी, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और संतुलित खानपान को शामिल करना ब्लड शुगर नियंत्रण में सहायक हो सकता है।
