यूपी में सोलर बिजली बेचने का नया सिस्टम! पड़ोसियों को भी बेच सकेंगे अतिरिक्त बिजली
गाजियाबाद में जल्द शुरू होगी Peer-to-Peer (P2P) एनर्जी ट्रेडिंग व्यवस्था
उत्तर प्रदेश में सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक नई व्यवस्था शुरू होने जा रही है। इसके तहत घर की छत पर लगे सोलर पैनल से जरूरत से ज्यादा बनने वाली बिजली को सीधे पड़ोसी उपभोक्ताओं को बेचने का विकल्प मिल सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, गाजियाबाद में जल्द ही Peer-to-Peer (P2P) Energy Trading System लागू करने की तैयारी है। इस व्यवस्था में सोलर उपभोक्ता अपनी अतिरिक्त बिजली को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से दूसरे उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकेंगे।
⚡ कैसे काम करेगा P2P सिस्टम?
मौजूदा व्यवस्था में रूफटॉप सोलर से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को सामान्यतः ग्रिड में भेजा जाता है और उसके बदले निर्धारित नियमों के अनुसार समायोजन/क्रेडिट मिलता है।
P2P व्यवस्था में अतिरिक्त बिजली की खरीद-बिक्री के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। यानी जिस सोलर उपभोक्ता के पास अतिरिक्त बिजली उपलब्ध है, वह इसे जरूरत वाले नजदीकी उपभोक्ता को बेच सकेगा।
🏠 सोलर उपभोक्ताओं को क्या फायदा होगा?
इस व्यवस्था से सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए अपनी अतिरिक्त बिजली का उपयोग करने का एक और विकल्प उपलब्ध हो सकता है। खासतौर पर दिन के समय जब सोलर उत्पादन अधिक होता है और घर की खपत कम रहती है, उस अतिरिक्त बिजली को दूसरे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती है।
📱 डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगा लेनदेन
P2P एनर्जी ट्रेडिंग में बिजली की उपलब्धता, खरीद-बिक्री और भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित किए जाने की बात सामने आई है। इससे स्थानीय स्तर पर बिजली के लेनदेन को एक व्यवस्थित डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा सकेगा।
गाजियाबाद से शुरुआत की तैयारी
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक गाजियाबाद में इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में काम चल रहा है। हालांकि P2P ट्रेडिंग के वास्तविक संचालन, बिजली की दर, पात्र उपभोक्ता, मीटरिंग, भुगतान और अन्य तकनीकी नियमों की अंतिम जानकारी संबंधित आधिकारिक दिशानिर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।
नोट: P2P व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि उपभोक्ता पारंपरिक बिजली ग्रिड से अलग होकर अपनी लाइन से पड़ोसी को बिजली बेचेंगे। वास्तविक लेनदेन बिजली वितरण नेटवर्क और निर्धारित नियामकीय/मीटरिंग व्यवस्था के तहत ही होगा।
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