|
खबरों के लिए Follow करें Primary Ka Master चैनल

Full width home advertisement

ADVERTISEMENT

Post Page Advertisement [Top]

अपनी सैलरी, साहस और समर्पण से सरकारी विद्यालय को बना दिया मॉडल स्कूल; प्रेरक है शिक्षिका की कहानी

 

अपनी सैलरी, साहस और समर्पण से सरकारी विद्यालय को बना दिया मॉडल स्कूल; प्रेरक है शिक्षिका की कहानी


पीलीभीत: शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश सरकार ऐसे 81 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित किया है, जिन्होंने लीक से हटकर काम किया. ऐसी हीं पीलीभीत की एक शिक्षिका हैं, जिन्होंने अपने खर्च से सरकारी स्कूल की न सिर्फ काया पलट दी बल्कि बच्चों में शिक्षा का जुनून पैदा कर दिया. ऐसी समर्पित शिक्षिका सैयदा को योगी सरकार ने राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना है. ETV भारत टीम ने स्कूल का दौरा किया. देखें यह रिपोर्ट.


पीलीभीत जिले में मरौरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरू की प्रधान अध्यापिका सैयदा को उनके नवाचार, समर्पण और शिक्षा में उल्लेखनीय सुधार के लिए यह पुरस्कार दिया जा रहा है. पुरस्कार पाने वाली प्राथमिक विद्यालय की अध्यापिका सैयदा की कहानी एक दिन की नहीं, बल्कि वर्षों के सतत प्रयास की कहानी है. उन्होंने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर बदलकर रख दी है.

2013 से बदलाव की शुरुआत: साल 2013 में सैयदा का ट्रांसफर पीलीभीत के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया आगरु में हुआ था. तब विद्यालय में महज 58 बच्चे थे. इनमें से भी मुश्किल से 30 बच्चे हीं स्कूल आते थे. इसका मुख्य कारण विद्यालय के आसपास का माहौल अच्छा न होना था. विद्यालय के पास कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लगे थे. बिल्डिंग भी जर्जर थी, जिससे अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते थे.

 

इन चुनौतियों से निपटने के लिए सैयदा ने कमान संभाली और सबसे पहले स्कूल के लिए संसाधन जुटाना शुरू किया. स्थानीय ग्राम प्रधान से लेकर अन्य लोगों और समाजसेवियों से पैसे जुटाए गए. विद्यालय में बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था कराई. करीब 4 साल से विद्यालय में बच्चे फर्नीचर पर बैठ रहे हैं.

सहयोग और समर्पण से बदली तस्वीर: शिक्षकों के एकजुट प्रयास के जरिए विद्यालय के आसपास लगे पुराने कूड़े के ढेर हटवाए गए. गांव में जागरूकता अभियान चलाया गया, ताकि ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए आगे आएं.

तमाम प्रयासों के बाद आज विद्यालय में करीब 152 बच्चों का दाखिला है. अधिकांश बच्चे स्कूल भी आते हैं. इतना ही नहीं विद्यालय में शिक्षकों के साथ मिलकर सैयदा ने निजी खर्चे पर इनवर्टर की व्यवस्था कराई, ताकि लाइट न होने पर भी बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो.

 

विद्यालय के कमरे में आधुनिक लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया. यहां 200 से अधिक रोचक और ज्ञानवर्धक किताबें रखी गई हैं. इस लाइब्रेरी में बैठकर बच्चे आज बड़े इत्मीनान से पढ़ाई करते हैं. बड़ी एलईडी स्क्रीन पर बच्चे प्रेरणादायक कहानियां भी देखते हैं और इससे बहुत कुछ सीखते हैं.

वर्तमान में विद्यालय की तस्वीर कुछ अलग ही नजर आती है. बारिश भी स्कूल पहुंचने वाले बच्चों की संख्या पर असर नहीं डाल पाता. बारिश के बीच कुछ बच्चे प्रोजेक्टर पर मनोरंजन की चीज देखते मिले. कुछ किताबों में लीन थे.

सीमित संसाधनों में आधुनिक स्कूल: सैयदा के संघर्ष की कहानी ऐसी है कि 15 नवंबर 2008 को सहायक अध्यापक के रूप में यात्रा शुरू करने वाली सैयदा ने मई 2013 में जब पिपरिया अगरू की कमान संभाली, तब हालात काफी चुनौतीपूर्ण थे.

 

1978 में बना पुराना भवन बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा था. सैयदा ने हार मानने के बजाय इसे मिशन बनाया. उन्होंने अपनी निजी तनख्वाह से विद्यालय के लिए प्रोजेक्टर और लैपटॉप खरीदा, जिससे बच्चे आधुनिक तकनीक और स्मार्ट क्लास के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं.

इसके साथ ही शिक्षकों ने अपने खर्चे और ग्रामीणों के सहयोग से फर्नीचर की व्यवस्था की. समृद्ध लाइब्रेरी (पुस्तकालय) का निर्माण कराया, जिसमें 200 किताबें उपलब्ध हैं. उनकी लगन से विद्यालय का नामांकन बढ़कर 152 तक पहुंच गया. पहले ही प्रयास में यह स्कूल 'निपुण विद्यालय' घोषित हुआ.

विद्यालय स्टाफ का सहयोग: विद्यालय की शिक्षामित्र शिखा मिश्रा बताती हैं कि हमें बहुत गर्व महसूस हो रहा है. हम सभी स्टाफ का पूरा सहयोग रहा है. मैं 2006 से यहां कार्यरत हूं. 2013 में जब मैडम ने कार्यभार संभाला तो उनका बहुत संघर्ष रहा.

 

एक महिला होने के नाते उन्होंने काफी चुनौतियां झेलीं. पहले स्कूल में बहुत सी कमियां थीं, प्रोजेक्टर आदि कुछ नहीं था. उन्होंने अपनी सैलरी से बहुत कुछ किया है. पहले बच्चों की संख्या 100 से भी कम थी, जो अब बढ़कर 152-153 हो गई है. यह सब स्टाफ और मैडम की साझा मेहनत का नतीजा है.

क्या कहते हैं अभिभावक: ​अभिभावक रविंद्र कुमार ने कहा कि विद्यालय की व्यवस्था से प्रभावित होकर अपने बच्चे को यहां पढ़ाने भेजते हैं. बहुत अच्छा रिजल्ट मिला है. हमारा प्राथमिक विद्यालय आज निजी कॉन्वेंट स्कूलों से भी आगे निकल चुका है.

चाहे पढ़ाई का क्षेत्र हो, सुविधाएं हों या यहां का स्टाफ सब कुछ बहुत बढ़िया है. बच्चों के बैठने के लिए शानदार फर्नीचर है, प्रोजेक्टर से पढ़ाई होती है. पुस्तकालय समेत तमाम सुविधाएं एक ही छत के नीचे हैं। हमारे बच्चे निपुण बन रहे हैं.

 



पुरस्कार की राशि भी स्कूल को समर्पित: ​प्रधान अध्यापिका सैयदा ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि मेरे बच्चों की मेहनत और सहयोगी स्टाफ का है. 2013 में जब मैं आई थी, तो गंदगी दूर कर स्वच्छता पर जोर दिया. शौचालय बनवाए, खेल मैदान तैयार कराया.

आईसीटी लैब और लाइब्रेरी को सुसज्जित किया. बिजली की समस्या हल कर पंखे और इनवर्टर-बैटरी की व्यवस्था कराई ताकि बच्चे आराम से पढ़ सकें. राज्य पुरस्कार से जो 25,000 की धनराशि मिलेगी, उसे भी मैं विद्यालय के विकास और वॉल पेंटिंग आदि में ही लगाऊंगी.

अगर सच्ची लगन और मेहनत से काम किया जाए तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है. ​शिक्षिका सैयदा की यह यात्रा साबित करती है कि एक शिक्षक का संकल्प सरकारी स्कूल को भी किसी मॉडल स्कूल से बेहतर बना सकता है.





ADVERTISEMENT
Share:

Bottom Ad [Post Page]

IMPORTANT NOTICE
⚠️ इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरों को पढ़ने के बाद कृपया संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि अवश्य करें। किसी भी त्रुटि के लिए वेबसाइट प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा।
Primary Ka Master, Primary Ka Master News, UP Basic Shiksha News, Basic Shiksha Khabar, UPTET News, Super TET News, Teacher News, Shikshamitra News, Basic Shiksha Parishad, UP Education News, Sarkari Result, Teacher Recruitment, UP Teacher Vacancy, CTET News, D.El.Ed News, TET News, UPPSC News, Government Jobs, Sarkari Naukri, Latest Education News, UP School News, Basic Education Department News
Facebook WhatsApp Telegram Twitter Copy Share
WhatsApp Group Join