ककहरा के साथ फलदार पेड़ों की पाठशाला, यूपी के स्कूलों में जल्द बनेंगे 'खाद्य वन'
📰 ककहरा के साथ फलदार पेड़ों की पाठशाला, यूपी के स्कूलों में जल्द बनेंगे 'खाद्य वन'
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्राथमिक स्कूल अब केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि बच्चों के पोषण और प्रकृति से जुड़ाव के नए ठिकाने भी बनेंगे। योगी सरकार प्राथमिक विद्यालयों में खाद्य वन (फ्रूट फॉरेस्ट) विकसित करने की तैयारी कर रही है, जिससे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ प्राकृतिक पोषण भी मिल सके।
🍎 स्कूल परिसरों में लगेंगे फलदार पौधे
योजना के तहत स्कूल परिसर में उपलब्ध जमीन का उपयोग फलदार पौधे लगाने के लिए किया जाएगा। ऐसे पौधे लगाए जाएंगे जो स्थानीय जलवायु के अनुकूल हों और जिनसे बच्चों को समय-समय पर ताजे फल मिल सकें।
पहला चरण: पहले चरण में प्रदेशभर के 16,000 प्राथमिक विद्यालयों को चिह्नित किया गया है।
व्यावहारिक शिक्षा: बच्चे इन पौधों को केवल किताबों में नहीं पढ़ेंगे, बल्कि इन्हें उगते, फलते और विकसित होते हुए अपनी आंखों से देखेंगे।
🌱 'एक पेड़ लगाने' के साथ 'एक पेड़ पालने' की संस्कृति
इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्कूल में ही ताजे फल और प्राकृतिक पोषण से जोड़ना है। खाद्य वनों को स्कूलों में 'पोषण की जीवंत पाठशाला' के रूप में विकसित किया जाएगा।
छात्रों की सक्रिय भागीदारी: कक्षा और उम्र के अनुसार बच्चों को पौधों में पानी देने, उनकी वृद्धि दर्ज करने और उनके संरक्षण जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।
पर्यावरण से जुड़ाव: इससे 'एक पेड़ लगाने' के साथ ही 'एक पेड़ पालने' की संस्कृति विकसित होने का अवसर मिलेगा।
📈 पोषण का एक अतिरिक्त स्रोत
सरकार की यह पहल जमीन के बेहतर इस्तेमाल के साथ स्कूलों में हरियाली, बच्चों के पोषण और पर्यावरण शिक्षा को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्कूल में पैदा होने वाले फल जब बच्चों को खाने के लिए दिए जाएंगे, तो स्थानीय स्तर पर पोषण का एक अतिरिक्त स्रोत तैयार होगा।
नियमित रखरखाव और स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता मिलने पर आने वाले वर्षों में ये विद्यालय परिसर बच्चों के लिए पोषण, प्रकृति और सीखने के एकीकृत केंद्र के रूप में विकसित हो सकेंगे।
