जांच टीम ने दर्ज किए बीईओ के बयान, पुलिस रही तैनात
रविवार को लखनऊ में उपचार के दौरान शाहीन बेगम की हो गई थी मौत
संडीला। विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय टिमरूख के मामले में सोमवार को जांच टीम में ब्लॉक के पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी के बयान दर्ज किए गए। शिक्षिका के मौत के बाद शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन को लेकर बीआरसी पर पुलिस बल तैनात रहा। वहीं शिक्षकों ने शिक्षिका के लखनऊ आवास पर पहुंच कर परिवार के सदस्यों को सांत्वना दी।
प्राथमिक विद्यालय टिमरूख में रसोईगैस पाइप में आग लगने से दो रसोइयां झुलस गई थी। इस मामले में तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. बृजेश त्रिपाठी पर परिजनों ने प्रभारी प्रधानाध्यापक शाहीन बेगम को धमकाने का आरोप लगाया था। जिससे उनकी तबीयत खराब हो गई थी और उनको लखनऊ में उपचार चल रहा था।
जहां पर रविवार को उनकी मौत हो गई। शिक्षिका के समर्थन पर शिक्षकों ने पूर्व में विरोध प्रदर्शन किया था। इसको देखते हुए सोमवार को बीआरसी परिसर में पुलिस बल तैनात रहा। बीआरसी आने वाले शिक्षकों से पूछताछ की गई।
वहीं, सोमवार को शाहीन बानो का अंतिम संस्कार लखनऊ के असियामऊ कब्रिस्तान में परिजनों ने कर दिया। जिसमें जनपद से शिक्षक और विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी पहुंचे।
शिक्षकों ने उनके घर पहुंचकर शोकाकुल परिवार को ढाढ़स बंधाया और हर संभव सहयोग का भरोसा दिया।
इनमें अनंत कुमार, देवेंद्र कुमार बाजपेयी, ब्लॉक अध्यक्ष, मो. हारून, शैलेंद्र मौर्या, मंत्री संडीला, दुर्गेश जायसवाल व नूरुल हसन, उपाध्यक्ष, अतुल द्विवेदी, शक्ति
साहू, माधुरी और सतीश आदि शामिल रहे।
वहीं, इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच चल रही है। सोमवार को जॉइंट मजिस्ट्रेट व एसडीएम संडीला नारायणी भाटिया ने खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. बृजेश कुमार त्रिपाठी समेत अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए हैं।
जांच के दौरान घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी जुटाई गई।
शाहीन बानो प्रकरण: अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब, जांच के बीच BEO के बयान पर टिकी नजर
🕯️ सैकड़ों की मौजूदगी में हुई शिक्षिका की अंतिम विदाई, शिक्षक संगठन और शिक्षक-शिक्षिकाएं भी रहे शामिल
📍 हरदोई | संडीला |
➡️ संडीला विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय टिमरुख की इंचार्ज सहायक अध्यापिका शाहीन बानो की रविवार शाम लखनऊ में उपचार के दौरान मौत के बाद सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम विदाई में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे।
🕯️ अंतिम विदाई में सैकड़ों लोग मौजूद
शाहीन बानो के अंतिम संस्कार में परिवार, क्षेत्रीय लोग, शिक्षक संगठन के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुए। लोगों ने दिवंगत शिक्षिका को श्रद्धांजलि दी। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल गमगीन रहा।
✊ शिक्षक संगठन भी अंतिम संस्कार में शामिल
शाहीन बानो प्रकरण को लेकर पिछले दिनों शिक्षक संगठनों ने धरना-प्रदर्शन कर जांच और कार्रवाई की मांग उठाई थी। सोमवार को शिक्षक संगठन के पदाधिकारी और शिक्षक-शिक्षिकाएं अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए।
⚖️ जांच कमेटी के सामने BEO का पक्ष अहम
तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. ब्रजेश त्रिपाठी को सोमवार शाम 5 बजे तक जांच कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखने का समय दिया गया था। अब शाम 6:30 बजे के बाद यह समय-सीमा पूरी हो चुकी है।
🔎 BEO का बयान दर्ज हुआ या नहीं?
उपलब्ध जानकारी में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि निर्धारित समय तक डॉ. ब्रजेश त्रिपाठी का बयान जांच कमेटी के समक्ष दर्ज हुआ या नहीं। इसकी स्थिति जांच कमेटी या प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट होगी।
⚠️ परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
परिजनों का आरोप है कि विद्यालय में हुई कथित आगजनी की घटना के बाद BEO की ओर से शाहीन बानो को फोन किया गया था। परिजनों के मुताबिक इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्या हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
🏥 लखनऊ में चला उपचार, रविवार को मौत
तबीयत बिगड़ने के बाद शाहीन बानो को लखनऊ में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। रविवार शाम उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
🔎 DM की जांच कमेटी कर चुकी स्थलीय पड़ताल
जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच कमेटी प्राथमिक विद्यालय टिमरुख पहुंचकर स्थलीय जांच कर चुकी है।
📌 BEO को मुख्यालय से किया जा चुका संबद्ध
बेसिक शिक्षा विभाग ने डॉ. ब्रजेश त्रिपाठी को संडीला से हटाकर जिला मुख्यालय कार्यालय से संबद्ध किया है।
👩👧 परिवार की कार्रवाई की मांग बरकरार
शाहीन बानो के परिवार की ओर से संबंधित BEO के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
❗ अब जांच के अगले चरण पर नजर
शाहीन बानो को अंतिम विदाई दी जा चुकी है, लेकिन जांच अभी बाकी है। अब जांच कमेटी की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर है।
⚠️ नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी, विभागीय कार्रवाई और परिजनों के आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी आरोपों से इनकार कर चुके हैं। अंतिम तथ्य जांच एवं सक्षम प्राधिकारी/न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष से निर्धारित होंगे।
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