RTI के जवाब से TET को लेकर उठे सवाल, अप्रशिक्षित शिक्षकों के लिए तय समय-सीमा का क्या है आधार?
नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से प्राप्त RTI जानकारी के बाद TET (Teacher Eligibility Test) को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है।
RTI में बताया गया है कि 11 फरवरी 2011 को RTE अधिनियम की धारा 23(2) में संशोधन किया गया था। इसके तहत कार्यरत “अप्रशिक्षित (Untrained)” शिक्षकों को न्यूनतम योग्यता प्राप्त करने के लिए समय-सीमा 31 मार्च 2019 तक निर्धारित की गई थी।
वहीं, 3 अगस्त 2017 को सभी राज्यों को इस संबंध में पुनः अवगत कराया गया था।
लेकिन अब उठ रहा है बड़ा सवाल
RTI में जिन शिक्षकों के लिए प्रावधान का उल्लेख किया गया है, उन्हें स्पष्ट रूप से “अप्रशिक्षित/Untrained” शिक्षक कहा गया है। ऐसे में सवाल यह है कि TET स्वयं कोई शिक्षक प्रशिक्षण (Training) नहीं है, बल्कि शिक्षक पात्रता परीक्षा है।
इसलिए चर्चा का विषय यह बन गया है कि यदि संबंधित प्रावधान का उद्देश्य अप्रशिक्षित शिक्षकों को न्यूनतम प्रशिक्षण/योग्यता हासिल करवाना था, तो उसमें TET की भूमिका को किस आधार पर जोड़ा गया?
शिक्षक समुदाय में उठ रहे सवाल
क्या TET को प्रशिक्षण के बराबर माना जा सकता है?
क्या TET उत्तीर्ण करना शिक्षक का प्रशिक्षण पूर्ण होना माना जाएगा?
और यदि नहीं, तो RTE की धारा 23(2) में निर्धारित “अप्रशिक्षित शिक्षकों” की श्रेणी में TET को लेकर स्थिति क्या है?
RTI में सामने आई जानकारी ने इन सवालों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब शिक्षकों की नजर इस बात पर है कि शिक्षा मंत्रालय और संबंधित विभाग इस अंतर—“TET परीक्षा” और “शिक्षक प्रशिक्षण”—को किस प्रकार स्पष्ट करते हैं।
नोट: अंतिम कानूनी निष्कर्ष के लिए संबंधित RTE संशोधन, NCTE की अधिसूचनाओं और आधिकारिक दस्तावेजों का पूरा संदर्भ देखना आवश्यक होगा।


