स्कूल की टोंटी* से लेकर *टूटी दीवार* तक… *सवाल सिर्फ शिक्षक से क्यों?*
* आजकल कुछ गाँवों में स्कूल की छोटी-छोटी कमियों के वीडियो बनाकर खूब दिखाए जा रहे हैं—
*टोंटी* लगी है तो टूटी क्यों है?
*नल* है तो पानी क्यों नहीं आ रहा?
*गेट* टूटा क्यों है?
*व्यवस्था* ऐसी क्यों है?
*सवाल बिल्कुल पूछिए…* लेकिन सवाल करने से पहले जिम्मेदारी भी याद रखिए।
*बहुत से स्कूल ऐसे हैं जहाँ* शिक्षक बार-बार टोंटियाँ लगवाते रहे, गेट ठीक करवाते रहे, दीवारें बनवाते रहे…
*लेकिन गाँव के कुछ लोगों ने* उन्हें तोड़ने में कभी कसर नहीं छोड़ी।
*कहीं* गेट तोड़ दिया,
*कहीं* दीवार तोड़ दी,
*कहीं* दीवारों पर गालियाँ लिख दीं,
*कहीं* स्कूल का इन्वर्टर और बैटरी तक चोरी हो गई। 😒
तब वही शिक्षक गाँव में जाकर कहते थे—
*“भाई, स्कूल आपका भी है…* इसे बचाइए।”
* लेकिन तब किसी ने *वीडियो* बनाकर यह नहीं पूछा कि
*“आखिर स्कूल की चीजें तोड़ कौन रहा है?”*
आज व्यवस्था की कमी दिखाई दे रही है तो सवाल उठाइए, जरूर उठाइए।
लेकिन जिस चीज़ को समाज खुद नुकसान पहुँचाता है, उसके लिए *केवल शिक्षक को जिम्मेदार ठहराना भी कहाँ तक सही है?*
स्कूल सुधारना है तो सिर्फ कमियाँ गिनाने से नहीं होगा…
स्कूल की चीजों की हिफाजत भी करनी होगी।
* क्योंकि सरकारी स्कूल किसी एक अध्यापक का नहीं, पूरे गाँव के बच्चों का भविष्य है।
*और भविष्य बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ शिक्षक की नहीं, समाज की भी है।* ✅
-- एक आम शिक्षक 👨🏻🏫