69000 शिक्षक भर्ती: आठ सितंबर से लगातार सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अभ्यर्थियों का भविष्य लंबे समय तक अधर में नहीं रह सकता
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाला मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अभ्यर्थियों के भविष्य पर फैसला होना चाहिए और उन्हें लंबे समय तक अधर में नहीं रखा जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आठ सितंबर से लगातार तीन दिन सुनवाई करने का निर्णय लिया है। जस्टिस एवीएन भट्टी और जस्टिस मनमीप अंगरिया की पीठ ने कहा कि अभ्यर्थी लंबे समय से दुविधा की स्थिति में हैं, इसलिए उनके भविष्य को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता।
आवेदकों और आपत्तियों की सूची तैयार करने का निर्देश
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील से मामले में शामिल आवेदकों, आपत्तियों और मांगों के समूह तैयार करने को कहा है। सरकारी वकील को दो सप्ताह के भीतर ऐसी सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किन-किन पक्षों को किस मुद्दे पर सुना जाना है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि मामले में सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।
नोडल काउंसलर को हटाया गया
सुनवाई के दौरान पीठ ने नोडल काउंसलर मंदीप कालरा को तत्काल हटाने का निर्देश दिया। उनकी जगह राज्य सरकार के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) अधिकृत पैनल में नए नोडल काउंसलर की नियुक्ति की गई।
18 अगस्त तक रिपोर्ट देगी सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पहले दिए गए सीटों के आंकड़ों को फिलहाल स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब आंकड़ों को 18 अगस्त तक तीन श्रेणियों में बांटकर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
इनमें ‘आरक्षित पीड़ित यानी अभ्यर्थी’, ‘हाईकोर्ट में याचिका नहीं करने वाले अभ्यर्थी’ और ‘13 अगस्त 2024 के लखनऊ डबल बेंच के आदेश से प्रभावित अभ्यर्थी’ शामिल हैं।
पीठ ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 8, 9 और 10 सितंबर को होगी। इन लगातार सुनवाइयों के बाद 69,000 शिक्षक भर्ती विवाद में लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है।
