शिक्षक दिवस पर शिक्षा को बड़ा मुद्दा बनाएगी समाजवादी पार्टी, 26 हजार विद्यालयों के विलय का विरोध
, लखनऊ। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को घेरने में जुटी समाजवादी पार्टी (सपा) अब शिक्षा के मुद्दे को राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में लाने की तैयारी में है। युवाओं और विद्यार्थियों के बीच सरकार के खिलाफ दिख रहे असंतोष तथा प्रदेश में स्कूली विद्यार्थियों के सड़कों पर उतरने की घटनाओं के बीच पार्टी ने प्रदेशव्यापी प्रदर्शन की रणनीति बनाई है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि 5 सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर पार्टी कार्यकर्ता प्रदेश के सभी विलय किए गए 26 हजार परिषदीय विद्यालयों पर पहुंचेंगे। इस दौरान विद्यालयों को बंद किए जाने और पीडीए को शिक्षा से वंचित करने का मुद्दा उठाया जाएगा।
शिक्षकों की कमी और स्कूलों के विलय का मुद्दा
पार्टी की ओर से शिक्षक दिवस पर शिक्षकों की कमी, स्कूलों में सुविधाओं के अभाव और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर भाजपा सरकार को घेरने की तैयारी है। सपा का आरोप है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में परिषदीय विद्यालयों का विलय किया गया है, जिससे ग्रामीण और वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
पार्टी के अनुसार, विलय किए गए 26 हजार विद्यालयों पर 5 सितंबर को बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। कार्यकर्ता इन विद्यालयों के संचालन की मांग उठाएंगे।
पेपर लीक और युवाओं के मुद्दे भी उठेंगे
नीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बाद राजनीतिक दल युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सपा ने भी आंदोलन में खुलकर युवाओं का समर्थन किया था।
पार्टी का कहना है कि शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को युवाओं के बीच प्रमुखता से उठाया जाएगा। वहीं परिषदीय विद्यालयों के विलय का मुद्दा भी पार्टी के आंदोलन का हिस्सा रहेगा।
पीडीए पाठशालाओं के जरिए भी विरोध
सपा ने पहले प्रदेश भर में पीडीए पाठशालाएं चलाकर शिक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाया था। अब पार्टी का कहना है कि राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई हिस्सों में विद्यार्थियों के विरोध-प्रदर्शन सामने आए हैं। ऐसे में स्कूलों के विलय से पीडीए को शिक्षा से वंचित करने के आरोपों को फिर मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
अखिलेश यादव का कहना है कि प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा बंद किए गए सभी 26 हजार विद्यालयों के बाहर शिक्षक दिवस के दिन पार्टी कार्यकर्ता पहुंचेंगे और मांग करेंगे कि इन विद्यालयों में फिर से पढ़ाई शुरू कराई जाए।
सपा की रणनीति में शिक्षा और रोजगार को जोड़कर युवाओं के बीच राजनीतिक संदेश देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
