अंतरजनपदीय ट्रांसफर में अन्य विभागों में कार्यरत पति/पत्नी पर हाईकोर्ट का नवीनतम आदेश
1. इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ ने रिट-ए संख्या 6143/2026 (Surjit Kumar एवं 18 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य) में 18 जून 2026 को पारित आदेश में उन सहायक अध्यापकों की याचिका पर सुनवाई की, जिन्होंने अंतरजनपदीय स्थानांतरण प्रक्रिया (शैक्षिक सत्र 2026-27) में अपने जीवनसाथी के सरकारी सेवा में कार्यरत होने के आधार पर स्थानांतरण पर विचार किए जाने की मांग की थी।
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2. याचिकाकर्ताओं का पक्ष था कि उनकी पत्नियाँ विभिन्न सरकारी विभागों में नियमित सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, जबकि 04.06.2026 के शासनादेश में जीवनसाथी संबंधी लाभ केवल उन मामलों तक सीमित कर दिया गया है, जहाँ पति-पत्नी दोनों बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षक हों। इसी शर्त के कारण उन्हें स्थानांतरण प्रक्रिया में समान अवसर नहीं मिल रहा है।
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3. याचिका में यह भी प्रार्थना की गई कि वर्तमान अंतरजनपदीय स्थानांतरण प्रक्रिया में याचिकाकर्ताओं को शामिल किया जाए तथा शासनादेश दिनांक 04.06.2026 के पैरा-3 के उप-पैरा (4) में वर्णित उस शर्त को लागू न किया जाए, जिसके अनुसार यदि पति-पत्नी दोनों बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक हों तो उनमें से केवल एक का ही कम PTR वाले जिले में स्थानांतरण किया जा सकता है।
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4. राज्य की ओर से प्रस्तुत किया गया कि याचिकाकर्ताओं ने शासनादेश को प्रत्यक्ष रूप से चुनौती नहीं दी है, इसलिए मांगी गई राहत प्रदान नहीं की जा सकती।
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5. न्यायालय ने आदेश में यह उल्लेख किया कि "बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों के शिक्षक सरकारी सेवकों की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं"। इसके बाद न्यायालय ने इस आधार पर किसी अधिकार की अंतिम घोषणा या शासनादेश की वैधता पर निर्णय दिए बिना याचिकाकर्ताओं को नया प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी।
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6. न्यायालय ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता 10 दिनों के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। प्रतिवेदन प्राप्त होने पर प्रतिवादी संख्या-1 उसे विधि के अनुसार एक माह के भीतर विचार कर निर्णय लें तथा यह निर्णय न्यायालय की किसी टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना किया जाए।
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7. इस आदेश में शासनादेश दिनांक 04.06.2026 को निरस्त नहीं किया गया है और न ही याचिकाकर्ताओं के स्थानांतरण का कोई अंतिम निर्देश दिया गया है। वर्तमान आदेश मुख्यतः सक्षम प्राधिकारी को प्रतिवेदन पर विधि के अनुसार विचार कर निर्णय लेने का निर्देश देता है।
