प्रदेश के 189138 आंगनबाड़ी केंद्रों में से सिर्फ 94353 की स्कूलों के साथ मैपिंग
प्रयागराज : आंगनबाड़ी केंद्रों की विद्यालयों के साथ मैपिंग प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसके तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को उनके निकटतम प्राथमिक या परिषदीय विद्यालयों से जोड़ा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा को औपचारिक प्राथमिक शिक्षा के साथ जोड़ना है। ऐसा न करने पर बच्चों के शुरुआती विकास और योजनाओं के क्रियान्वयन में व्यवधान आता है।
मिड डे मील योजना के साथ स्कूल रेडीनेस जैसे कार्यक्रम प्रभावित होते हैं। प्रदेश स्तर पर अब तक मात्र 49.89 प्रतिशत केंद्रों की मैपिंग हुई है। इस कार्य में श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, आंबेडकर नगर, जालौन, महाराजगंज जैसे जिले सबसे निचले पायदान पर हैं। यहां क्रमशः छह प्रतिशत, 5.7 प्रतिशत, सात प्रतिशत, 8.6 प्रतिशत, नौ प्रतिशत मैपिंग हुई है। प्रयागराज में यह आंकड़ा 71 प्रतिशत है। यहां 4502 आंगनबाड़ी में से 3200 की मैपिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। प्रतापगढ़ में 81 प्रतिशत कार्य हुआ है। भदोही, पीलीभीत, मुजफ्फरनगर
में शत प्रतिशत कार्य हो चुका है। अमेठी, देवरिया में 96 प्रतिशत, बदायूं में 95 प्रतिशत कार्य हुआ है। मैपिंग में राजधानी लखनऊ बहुत पीछे है। सिर्फ 15 प्रतिशत केंद्रों की मैपिंग कराई गई है। यहां 2730 आंगनबाड़ी में से 416 की मैपिंग हुई है। कानपुर नगर में 39 प्रतिशत, वाराणसी में 60 प्रतिशत कार्य हुआ है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से समीक्षा के बाद जारी पत्र के अनुसार अब तक 39 जिलों में 50 प्रतिशत कार्य भी नहीं हुआ है। सीतापुर व हरदोई में 47 प्रतिशत, आगरा में 46 प्रतिशत, फिरोजाबाद में 45 प्रतिशत, कन्नौज में 43 प्रतिशत, महोबा में 42 प्रतिशत, रायबरेली में 41 प्रतिशत ही कार्य हुआ है। बीएसए अनिल कुमार के अनुसार 30 जून तक यह कार्य मिशन मोड में पूरा करना था लेकिन अभी लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। विद्यालयों की आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ मैपिंग व हाट कुक्ड मील पोर्टल की गई मैपिंग की पुष्टि की जाती है। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी जनपदों में दिशा निर्देश भेज दिए गए हैं।
