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केवल शिक्षकों के लिए ‘विशेष टीईटी’ सरकार के लिए चुनौती

 

केवल शिक्षकों के लिए ‘विशेष टीईटी’ सरकार के लिए चुनौती

 

बेरोजगारों व शिक्षामित्रों को बाहर रखने पर विवाद होना तय, गाइडलाइन बनी बाधा


केवल शिक्षकों के लिए ‘विशेष टीईटी’ सरकार के लिए चुनौती

प्रयागराज, मुख्य संवाददाता। चुनावी साल में सेवारत परिषदीय शिक्षकों को तोहफा देते हुए प्रदेश सरकार विशेष टीईटी कराने पर विचार कर रही है, लेकिन इसे कराना चुनौतीपूर्ण साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 और उसके बाद के फैसलों के बाद सरकार यह कदम उठाने जा रही है। यदि बेरोजगारों और शिक्षामित्रों को सेवा से बाहर रखा गया तो विवाद होना तय है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा है कि आरटीई लागू होने से पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी करना अनिवार्य है।






इसी बीच महत्वपूर्ण कानूनी सवाल है कि क्या आरटीई के तहत टीईटी में बैठने के पात्र योग्य अभ्यर्थियों को विशेष टीईटी के आवेदन से वंचित किया जा सकता है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने अपने दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया है कि टीईटी सभी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता रखने वाले पात्र अभ्यर्थियों के लिए खुला होना चाहिए। परीक्षा का आयोजन केंद्र और राज्य सरकारें करेंगी, पर एनसीटीई के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है। इसमें पारदर्शिता, सुरक्षा और समान अवसर पर विशेष बल दिया गया है।


सरकार यदि विशेष टीईटी से शिक्षामित्रों और अन्य पात्र अभ्यर्थियों (नए युवा उम्मीदवारों) को पूरी तरह बाहर रखती है तो यह आरटीई एक्ट 2009 से टकराव माना जा सकता है। क्योंकि एनसीटीई टीईटी को सभी योग्य व्यक्तियों के लिए न्यूनतम बेंचमार्क मानती है, न कि केवल इन-सर्विस शिक्षकों तक सीमित।

उधर शिक्षामित्र भी अपनी लंबी सेवा का हवाला देते हुए लंबे समय से विभागीय टीईटी की मांग कर रहे हैं।

वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश सरकार ने हिंदी, उर्दू और संस्कृत की भाषा टीईटी कराई थी, जिसमें एनसीटीई के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए निबंधात्मक प्रश्न तक पूछे गए थे। उर्दू टीईटी लगभग छह हजार बेरोजगारों को नौकरी भी दे चुकी है। उक्त भाषा टीईटी को नूतन ठाकुर ने जनहित याचिका में चुनौती दी थी, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि वह भविष्य में एनसीटीई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही टीईटी आयोजित करेगी। इस पर उच्च न्यायालय ने नियुक्त हो चुके शिक्षक-शिक्षिकाओं को राहत प्रदान कर दी थी।


इस प्रकार से भाषा टीईटी को निरस्त तो नहीं किया गया, लेकिन सरकार को उच्च न्यायालय ने ऐसी गलती न दोहराने की हिदायत दी थी। ऐसे में विशेष टीईटी कराना सरकार के लिए अग्निपरीक्षा साबित हो सकता है।

प्रमुख बिंदु

पहले उर्दू की विशेष टीईटी को एनसीटीई ने गलत माना था।

सरकार ने विशेष टीईटी के लिए निदेशक से सूचना मांगी है।

बेरोजगारों और शिक्षामित्रों को बाहर रखने पर कानूनी विवाद की आशंका।

एनसीटीई के दिशा-निर्देशों में सभी पात्र अभ्यर्थियों के लिए टीईटी खुली रखने की बात कही गई है।





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