आठवें आयोग के समक्ष कर्मचारी बोले, वेतन में इजाफे से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था
एसीएस दीपक कुमार ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति और दस वर्षों का रखा लेखा-जोखा
पेंशनरों ने कटौती और 80 वर्ष से पहले अतिरिक्त पेंशन देने की उठाई मांग
लखनऊ। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का दो दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरा सोमवार से शुरू हो गया। आयोग के सदस्य पंकज जैन की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय टीम ने सुबह आठ बजे से लगातार बैठकें शुरू कीं। पहले सत्र में अपर मुख्य सचिव (वित्त) दीपक कुमार ने आयोग को प्रदेश की आर्थिक एवं वित्तीय स्थिति, पिछले दस वर्षों की आय-व्यय, वेतन और पेंशन पर होने वाले खर्च का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
इसके बाद विभिन्न अखिल भारतीय सेवा संगठनों, केंद्रीय कर्मचारी संगठनों तथा पेंशनर्स संगठनों ने आयोग को सुझाव दिए। आयोग ने आईएफएस, आईपीएस व आईएफएस (वन) एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों की भी बातें सुनीं। इन संगठनों ने वेतन संरचना, सेवा शर्तों, पदोन्नति और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर प्रस्तुतीकरण दिया। बाद में आयोग की कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स संगठनों के साथ अलग-अलग बैठकें भी हुईं।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जगन तिवारी और महामंत्री अरुणा शुक्ला ने आयोग के समक्ष अपनी बात रखी। अध्यक्ष जगन तिवारी ने कहा कि वेतन आयोग लागू करने से मैक्रो इकोनॉमिक इम्पैक्ट का असर राज्यों पर नहीं पड़ेगा क्योंकि वेतन संरचना में बढ़ोतरी से कर्मचारियों की जेब में अधिक पैसा आएगा और वे उस पैसे को बाजार में खर्च करेंगे, जिससे जीएसटी की वृद्धि होगी। बचत योजनाओं में भी पैसा लगेगा जिसका सीधा लाभ सरकार को पूंजीगत निवेश के रूप में होगा। वेतन में बढ़ोतरी से इनकम टैक्स के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ेगी, जिससे सरकार का राजस्व बढ़ेगा।
बैठक के लिए राज्य सरकार ने पांच नोडल अधिकारियों को नामित किया है। विशेष सचिव नील रतन कुमार को समय समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। आलोक दीक्षित वित्तीय प्रभाव, बीके सिंह पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभ, पुष्पराज वेतनमान तथा अनुराग गुप्ता भत्तों एवं अन्य सुविधाओं से संबंधित प्रस्तुतियां आयोग के समक्ष रख रहे हैं।
65 वर्ष से मांगी पांच फीसदी अतिरिक्त पेंशन
बैठक में शामिल ऑल इंडिया स्टेट पेंशनर्स फेडरेशन और संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति के प्रतिनिधियों ने पेंशन के राशिकरण (कम्यूटेशन) की अवधि कम करने की मांग उठाई। समिति के संयोजक ओमकार नाथ तिवारी ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में पेंशन का 40 प्रतिशत हिस्सा काटा जाता है। जबकि 8 प्रतिशत ब्याज के साथ भी इसकी रिकवरी लगभग 10 वर्ष 11 माह में पूरी हो जाती है। इसके बाद भी 15 वर्ष तक कटौती जारी रहती है।
उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति की उस सिफारिश का भी हवाला दिया, जिसमें 65, 70 और 75 वर्ष की आयु पर पांच-पांच प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन देने की बात कही गई थी। उनका कहना था कि वर्तमान में 80 वर्ष की आयु पूरी होने पर ही 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन मिलती है, जबकि बड़ी संख्या में पेंशनर इससे पहले ही दिवंगत हो जाते हैं। आयोग ने इस पर सभी सुझावों पर विचार कर रिपोर्ट तैयार करने का आश्वासन दिया।
तय समय से पहले आ सकती है रिपोर्ट
आयोग की कार्यशैली को देखते हुए कर्मचारी संगठनों में यह चर्चा तेज है कि आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट तय समय से पहले आ सकती है। आयोग दिल्ली, लद्दाख और श्रीनगर के बाद अब लखनऊ पहुंचा है। इसके बाद 6-7 जुलाई को भुवनेश्वर और 9-10 जुलाई को कोलकाता में बैठकें प्रस्तावित हैं। आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 15 जून को समाप्त हो चुकी है। इसके बाद अब पूरा फोकस क्षेत्रीय बैठकों और रिपोर्ट तैयार करने पर है।
आज अपना पक्ष रखेगा ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ डिप्लोमा इंजीनियर्स
आयोग के समक्ष मंगलवार को ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ डिप्लोमा इंजीनियर्स अपना पक्ष प्रस्तुत करेगा। प्रतिनिधिमंडल वेतन संरचना, न्यूनतम वेतन, फिटमेंट फैक्टर, वार्षिक वेतन वृद्धि और पे-स्केल मर्जर समेत विभिन्न मुद्दों पर अपना पक्ष रखेगा। संगठन पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाएगा।
