विशेष टीईटी के लिए मांगा शिक्षकों का विवरण, 25 जून तक देनी होगी जानकारी
प्रयागराज। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी (Teacher Eligibility Test) उत्तीर्ण होना अनिवार्य किए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी आयोजित करने की तैयारी में जुट गई है। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सभी बीएसए से शिक्षकों का विस्तृत विवरण मांगा है।
बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी द्वारा जारी निर्देशों में पूछा गया है कि जनपदवार कितने शिक्षक टीईटी/सीटीईटी उत्तीर्ण हैं और कितने शिक्षक अभी तक टीईटी या सीटीईटी उत्तीर्ण नहीं कर पाए हैं। यह जानकारी 25 जून तक परिषद की ई-मेल आईडी पर उपलब्ध कराने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई तैयारी
परिषद द्वारा भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश बनाम अनुजेशम स्थान-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 29 मई 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से शिक्षकों का डेटा एकत्र किया जा रहा है।
बीटीसी शिक्षक संघ ने की शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को शामिल करने की मांग
इस बीच उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने सरकार से मांग की है कि विशेष टीईटी में केवल कार्यरत शिक्षक ही नहीं, बल्कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को भी शामिल किया जाए। संघ का कहना है कि इन कर्मचारियों को भी परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि वे भी लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं।
संघ के प्रदेश महामंत्री संदीप तून ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं जिन्होंने अभी तक टीईटी या सीटीईटी उत्तीर्ण नहीं किया है। ऐसे में विशेष टीईटी उनके लिए राहत का माध्यम बन सकती है।
1.86 लाख से अधिक शिक्षक बताए जा रहे बिना टीईटी/सीटीईटी
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में लगभग 1.86 लाख शिक्षक ऐसे हैं जो वर्तमान में टीईटी अथवा सीटीईटी उत्तीर्ण किए बिना कार्यरत हैं। सरकार द्वारा प्रस्तावित विशेष टीईटी को लेकर इन शिक्षकों में विशेष उत्सुकता देखी जा रही है।
यदि विशेष टीईटी आयोजित होती है, तो यह बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षकों को आवश्यक पात्रता प्राप्त करने का अवसर प्रदान कर सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाना अभी बाकी है।
