पेट्रोलियम कंपनियों को प्रत्येक सिलेंडर पर 703 रुपये का हो रहा नुकसान, केंद्र सरकार ने क्या बताया
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की लागत 1,600 से अधिक, अभी भी 700 रुपये का घाटा : केंद्र
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली :
केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के चलते 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से अधिक हो गई है। घरेलू एलपीजी सिलिंडर के दामों में बीते रोज की गई 29 रुपये की बढ़ोतरी के बावजूद सरकार को अभी भी प्रति सिलिंडर लगभग 700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस बीच विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि सरकार ने तीन माह में घरेलू सिलिंडर के दाम 89 रुपये बढ़ाकर आमजन की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। पश्चिम एश्यिा संकट के दौरान
कई देशों से ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के दावे का आखिर क्या हुआ ? वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि जब एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी होती है तो विपक्ष हंगामा खड़ा कर देता है। मगर वह यह क्यों नहीं बताता कि आज भी भारत में रसोई गैस दुनिया में सबसे सस्ते दामों पर उपलब्ध है।
प्रेट्र के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया
कि पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान के कारण फरवरी से जून के बीच एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगभग 46% की वृद्धि हुई है। भारत अपनी आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है लेकिन इसके बावजूद इस बोझ को सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं
डाला। घरेलू एलपीजी पर अंडर रिकवरी का बोझ लगभग 60,000 करोड़ तक पहुंच चुका है, जिसे सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां वहन कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, 10.58 करोड़ से अधिक उज्ज्वला लाभार्थियों को प्रति सिलिंडर 300 रुपये की प्रत्यक्ष सहायता भी जारी है।
