13 जुलाई के बाद ही तय होगा जिला और क्षेत्र पंचायतों में प्रशासक कौन
इलाहाबाद हाई कोर्ट में जवाब देने की तैयारियों में जुटी सरकार
लखनऊ :
जिला पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों में प्रशासक कौन होगा, इस निर्णय को लेकर फिलहाल पेच फंस गया है। पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में 13 जुलाई को अगली सुनवाई होने के बाद ही सरकार इस मसले पर किसी नतीजे पर पहुंच पाएगी क्योंकि हाई कोर्ट ने ग्राम पंचायतों में निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाने के फैसले पर तीखी टिप्पणी की है। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के सरकार के निर्णय को कोर्ट ने संविधान के विपरीत ठहराया है। जिला पंचायतों का कार्यकाल 11 जुलाई व क्षेत्र पंचायतों का 19 जुलाई को समाप्त हो रहा है।
पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाने पर प्रदेश सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बना दिया है। प्रधान ही प्रशासक के रूप में ग्राम पंचायतों का कामकाज देख
11 को जिला पंचायतों व 19 जुलाई को क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल होगा पूरा
रहे हैं। इन्हें नीतिगत निर्णय लेने और नए कामों को छोड़ ग्राम पंचायत से जुड़े अन्य कामों को करने की छूट दी गई है। नए कामों को कराने से पूर्व इन्हें संबंधित जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी। सरकार के इस फैसले के बाद माना जा रहा था कि कार्यकाल समाप्त होने पर जिला पंचायतों में जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायतों में ब्लाक प्रमुखों को सरकार प्रशासक की जिम्मेदारी
दे देगी। ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष भी यह मानकर चल रहे थे कि उन्हें ही प्रशासक बनाया जाएगा।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब प्रदेश सरकार हाई कोर्ट द्वारा मांगे गए जवाबों की तैयारी में उलझ गई है। प्रशासक के फैसले पर सरकार अब कोई तात्कालिक निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है। 13 जुलाई को सुनवाई में हाई कोर्ट द्वारा दिए जाने वाले आदेश पर ही अब सबकुछ निर्भर करेगा। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश सरकार अब 13 जुलाई के बाद ही जिला पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों में प्रशासक बनाने के बारे में कोई निर्णय करेगी। सरकार निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लाक प्रमुखों को ही प्रशासक बनाएगी या पूर्व की भांति जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों को बनाएगी, यह तभी तय होगा।
