दो हजार रुपये मानदेय... वो भी सिर्फ 10 महीने
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयो के रसोइयों ने मानदेय बढ़ाने एवं सेवा शर्तें तय करने की मांग की है क्योंकि उन्हें केवल 10 महीने मात्र 2000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। सेवा शर्तें तय न होने के कारण अवकाश व कैशलेस इलाज आदि में दिक्कत होती है।
प्रदेश के 1.33 लाख परिषदीय विद्यालयों में दो-दो यानी लगभग 2.50
रसोइयों ने की मानदेय बढ़ाने एवं सेवा शर्तें तय करने की मांग
लाख रसोइये तैनात हैं। परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) तैयार करने वाली रसोइयों की अब तक कोई सेवा शर्तें तय नहीं की गई हैं। इसकी वजह से अपने मानदेय भुगतान से लेकर अवकाश, सेवानिवृत्ति
व अन्य सुविधाओं को लेकर इन्हें हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालत यह है कि शासनादेश के बावजूद कैशलेस चिकित्सा सुविधा का भी इन्हें सही से लाभ नहीं मिल पा रहा जबकि आकस्मिक अवकाश, चिकित्सा अवकाश, मातृत्व अवकाश या बाल्य देखभाल अवकाश जैसी कोई भी सुविधाएं इन्हें नहीं मिलती है।
