गांवों के स्कूलों में भरमार...शहर में शिक्षकों की मार
मुरादाबाद। जिले में शिक्षा विभाग की अजीब विसंगति तो देखिए, ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलाें में जहां शिक्षकों की भरमार है तो शहर में शिक्षकों के लाले हैं। शहर के कन्या जूनियर हाईस्कूल कुंदनपुर में 110 विद्यार्थी सिर्फ एक शिक्षिका के सहारे ज्ञान अर्जित कर रहे हैं तो ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय डिडौरी में 89 बच्चों को पढ़ाने के लिए दस शिक्षकों की नियुक्ति कर दी।
शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि विद्यालयों में शिक्षकों की विसंगति के कारण विद्यार्थियों की विषयों के अनुसार पढ़ाई नहीं हो पा रही है। वहीं, अधिकारियों के अनुसार सरकार के निर्देश पर समायोजन की प्रक्रिया संचालित की जा रही है।
मुरादाबाद जनपद में 1408 परिषदीय विद्यालयों में लगभग डेढ़ लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के आधार पर विद्यालयों में शिक्षकों की स्थिति बिल्कुल अलग है। जहां ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में मानकों से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं तो वहीं शहर क्षेत्र के विद्यालय शिक्षकों का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि नगर क्षेत्र में मल्टी सेक्टोरियल विद्यालय सोनकपुर कंपोजिट, जूनियर हाईस्कूल कुंदनपुर, प्राथमिक विद्यालय असालतपुरा, प्राथमिक विद्यालय कुंदनपुर, प्राथमिक विद्यालय गाड़ीखाना, प्राथमिक विद्यालय लाकड़ीवालान एक शिक्षक के सहारे संचालित किए जा रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय पंडित नगला, प्राथमिक विद्यालय उड़पुरा, प्राथमिक विद्यालय गलशहीद, प्राथमिक विद्यालय असालतपुरा कदीम को शिक्षामित्र संचालित कर रहे हैं।
ग्रामीण व नगर का कैडर अलग
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. नीरज कुमार शर्मा का कहना है कि आरटीई के मानक के अनुसार प्राइमरी स्कूल में 30 बच्चों पर एक और जूनियर विद्यालयों में 35 बच्चों पर एक शिक्षक नियुक्त होने का मानक है। वर्तमान में कैडर समस्या बन रहा है, क्योंकि ग्रामीण व देहात क्षेत्र का कैडर अलग-अलग होने की वजह से एक-दूसरे क्षेत्रों में शिक्षकों के स्थानांतरण नहीं किए जा सकते हैं। सरकार ने 15 साल पहले कैडर खोला था और उसी समय स्थानांतरण हुए थे। यदि सरकार यह विकल्प दोबारा दे देती है तो विद्यालयों में शिक्षकों का संतुलन आरटीई मानक के अनुसार बन जाएगा। इन वर्षों में नगर क्षेत्र में शिक्षकों के लगातार सेवानिवृत्त होने की वजह से कई स्कूल शिक्षक विहीन हो गए हैं। शहर के बच्चे पढ़ाई के साथ समझौता कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में अधिक संख्या में शिक्षक हैं और वह शहर क्षेत्र में आना भी चाहते हैं। विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण छात्र नामांकन पर इसका प्रभाव पड़ता है। अकेले शिक्षक का पूरा समय विभागीय सूचनाओं के आदान-प्रदान में बीत जाता है। ऐसे में वह नामांकन व बच्चों की पढ़ाई पर कैसे ध्यान दे पाएंगे।
विद्यालय बच्चों की संख्या शिक्षकों की संख्या
प्राथमिक विद्यालय डिडौरी 89 दस
जूनियर हाईस्कूल भीतखेडा 59 पांच
प्राथमिक विद्यालय पदिया नगला 49 पांच
जूनियर हाईस्कूल मानपुर पट्टी 41 चार
प्राथमिक विद्यालय अटरिया 52 चार
जूनियर हाईस्कूल ईलर रसूलाबाद 62 चार
कंपोजिट स्कूल मिलक बहरमार 62 चार
प्राथमिक विद्यालय कूकड़ झंडी 64 चार
जूनियर हाईस्कूल कमालपुर खालसा 65 छह
जूनि. हाई. रघुवाला 82 आठ
प्राथमक स्कूल छजलैट 102 नौ
प्राथमिक स्कूल हाशमपुर 156 दस
जूनियर हाईस्कूल फौडला पट्टी 102 नौ
कंपोजिट विद्यालय भगतपुर टांडा 150 नौ
प्राथमिक विद्यालय हाशमपुर गोपाल 156 दस
प्राथमिक विद्यालय कैय्यम शाह की मिलक 26 तीन
प्राथमिक विद्यालय सिरसवां हरचंद 22 तीन
नोट : शिक्षकों द्वारा 30 अप्रैल के नामांकन के आधार पर तैयार हुई समायोजन सूची में दी गई जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में बच्चों और शिक्षकों का विवरण। वर्तमान में छात्र संख्या में बदलाव हो सकता है।
सरकार की नीति के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति ग्रामीण क्षेत्रों में होती है। इसके बाद हर दस साल पर स्थानांतरण होता था। वर्ष 2012 से अभी स्थानांतरण नहीं हुआ है। इसके समाधान के लिए सरकार शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया अपना रही है। यह अभी न्यायालय में लंबित है। समायोजन हो जाएगा तो यह समस्या दूर जाएगी।
अमित सिंह, बीएसए