इकलौते शिक्षक के भरोसे चल रहे जिले के 20 परिषदीय विद्यालय
सुलतानपुर, । बच्चों को शिक्षित करने के लिए जिले में अन्य विद्यालयों के अलावा 2064 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। विभाग की मानें तो बच्चों की संख्या के हिसाब से विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती की गई है। क्योंकि जिले में शिक्षकों की कोई कमी नहीं है। इसके बाद भी जिले में 20 ऐसे विद्यालय संचालित हैं, जहां एक शिक्षक की तैनाती है। विभाग ने बताया कि शासनादेश के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में 30 बच्चों पर एक और जूनियर हाईस्कूलों में 35 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती होनी चाहिए। बताते चले कम छात्र संख्या होने के कारण बीएसए ने 46 विद्यालयों को मर्जर कर दिया था। इससे मानक पूरा हो गया।
बताते चले जिले में संचालित परिषदीय विद्यालयों में कल 184000 बच्चे पंजीकृत हैं। जिन्हें समय से निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, ड्रेस आदि प्रदान किया जाता है। इसके हिसाब से विभिन्न विद्यालयों पर 7500 शिक्षकों की तैनाती गई है। इनमें 1450 प्राथमिक, 343 उच्च प्राथमिक विद्यालय और 271 कम्पोजिट विद्यालय शामिल हैं। इन विद्यालयों में 7500 शिक्षकों की छात्र संख्या के मानक के अनुसार शिक्षकों की तैनाती
की गई है। यही कारण है कि किसी भी विद्यालय में शिक्षकों की कमी नहीं है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उपेन्द्र गुप्ता के प्रयास से जिले में छात्रों को अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र से पूर्व ही छात्रों को पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध हो गईं। इसके पहले बच्चों को किताब पाने के लिए सत्र शुरु होने के छह महीने तक इंतजार करना पड़ता था।
कम छात्र संख्या के कारण 46 विद्यालयों को किया मर्जरः जिले के 46 परिषदीय विद्यालय ऐसे हैं जिनमें शिक्षको की तैनाती तो अधिक रही। पर बच्चों की संख्या मानक के अनुसार नहीं थी। बीएसए उपेन्द्र गुप्ता ने 30 से कम छात्र संख्या वाले 46 परिषदीय विद्यालयों को बगल के विद्यालयों में मर्ज कर दिया। मर्जर वाले इन 46 विद्यालयों में से 28 में आंगनबाडी का संचालन हो रहा है।
अभी भी 270 विद्यालयों में बाउंड्रीवाल नहीं
जिले में काफी हद तक परिषदीय विद्यालयों में बाउंड्रीवाल की समस्या से निजात मिल गई है। 270 परिषदीय विद्यालयों में अभी बाउण्ड्रीवाल नहीं है। इन विद्यालयों में चहारदीवारी कराने का आदेश जिलाधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को दिया है। इसकी कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है।
146 जर्जर विद्यालयों का किया गया है ध्वस्तीकरण
लम्बे समय से संचालित जिले के 146 परिषदीय विद्यालय जर्जर हो गए थे। जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच कमेटी की सहमति के बाद इन विद्यालयों को लोक निर्माण विभाग ने कण्डम घोषित किया। इसके बाद ग्राम पंचायत प्रधानों की ओर से इन विद्यालयों का ध्वस्तीकरण कराया गया है
जिले में मानक के हिसाब GG से परिषदीय विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुपात में शिक्षकों की तैनाती की गई है। इस प्रकार किसी भी विद्यालय में शिक्षकों की कोई कमी नहीं है। जिन विद्यालयों बाउंड्रीवाल नहीं है, वहां पर वहां पर उसके निर्माण कराने की व्यवस्था की जा रही।
- उपेंद्र गुप्ता, बीएसए, सुलतानपुर।
